सोमवार, 27 अगस्त 2018

सरकारी महकमे की लापरवाही मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र के निर्देश के बाद भी नही हुई उर्जांचल के ग्राम पंचायतो मे किटनाशक छिडकाव।



* बरसात के उपरांत उत्पन्न होते है मच्छर व समुचे उर्जांचल मे होती है मलेरिया, डेंगु व अन्य मच्छरजनित रोगो से जनधन कि हानि।
* मच्छररोधी दवाओ के छिडकाव हेतु सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे के प्रेषित पर मुख्य चिकित्साधिकारी, सोनभद्र ने अधिक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर को किया था निर्देशित परन्तु नही हुआ छिडकाव।



:- उर्जांचल की ग्राम पंचायतो समेत ककरी ग्राम पंचायत मे मच्छरोधी दवा के छिडकाव हेतु सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे द्वारा जिलाधिकारी,सोनभद्र को पत्र लिखकर मच्छररोधी दवा छिडकाव की मांग की गई थी जिसके क्रम मे जिलाधिकारी,सोनभद्र द्वारा उपरोक्त पत्र को मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र को हस्तान्तरित कीया गया था तथा मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र द्वारा अप्रैल माह मे ही  अधिक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर को उर्जांचल की ग्राम पंचायतो समेत ककरी मे मच्छररोधी दवा का छिडकाव सुनिश्चित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया था परन्तु किसी प्रकार के दवा का छिडकाव नही हुआ तत्पश्चात अंकुश दुबे द्वारा पुनः 30 मई 2018 को जिलाधिकारी, सोनभद्र को शिकायती पत्र जिसमे मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र के निर्देश के उपरांत भी अधिक्षक, समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर द्वारा किटनाशक व मच्छररोधी दवाओ का छिडकाव न करवाये जाने व ग्राम पंचायतो को मच्छररोधी दवाये उपलब्ध न कराये जाने का वर्णन था प्रेषित किया था जिसके क्रम मे  मुख्य चिकित्साधिकारी, सोनभद्र द्वारा अधिक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर डा. राजीव रंजन की आख्या जिसमे अधिक्षक(सामु.स्वा.केन्द्र. म्योरपुर)द्वारा दवा के छिडकाव हेतु अजय कुमार राय को निर्देशित किया गया था कि पत्रावली अंकुश दुबे को प्रेषित की थी तथा दुरभाष के माध्यम से बताया था कि ककरी समेत सभी ग्राम पंचायतो मे दवा कि छिडकाव जल्द करा दिया जायेगा अतः आपको पत्र लिखने की कोई आवश्यकता नही है परन्तु सरकारी महकमे की लापरवाही देखिये दो माह उपरांत भी उर्जांचल की ग्राम पंचायतो को मच्छररोधी दवा उपब्ध नही कराई गयी है तथा ना हि मच्छररोधी दवा का छिडकाव हुआ है। मच्छररोधी व किटनाशक दवाईयो के मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र के निर्देश के बाद भी छिडकाव न होने पर अंकुश दुबे ने कहा कि उर्जांचल का दुर्भाग्य है कि सारे काम कागजी पन्नो पर ही हो रहे है और जब मच्छररोधी दवा के छिडकाव जैसी मुलभुत सूविधा ग्रामीणो को नही मिल पा रही है तो अब आगे कुछ आशा करना ही व्यर्थ है और सबसे आश्चर्यजनक है कि सरकारी अधिकारी व महकमा ग्रामीणो के स्वास्थ्य व जनधन को लेकर किस प्रकार लापरवाह है यह देखने और विचारणीय है साथ ही साथ ग्रामीण जनप्रतिनिधियो के नकारेपन का प्रमाण है।

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

जेल मे बन्द आदिवासियो के परिवारजनो से मिले कांग्रेसजन


:-लिलासी वन भूमि विवाद(दुध्दी) प्रकरण मे जेल मे बन्द आदिवासी महिलाओं सुकालो व किस्मतिया के उपर दुख जताते हुये कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा ट्विटर पर ट्विट किये जाने के बाद पुरा प्रकरण एक बार फिर तुल पकड चुका है। स्वतंत्रता दिवस के दिन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन सोनभद्र के जिला महासचिव अंकुश दुबे द्वारा भेजी गयी विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम जिसमे कांग्रेस रिसर्च सेल उत्तर प्रदेश के चैयरमैन गौरव कपूर व राजस्थान स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य तथा पुर्व मडिहान कांग्रेस विधायक ललितेश पति त्रिपाठी तथा प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट को राहुल गांधी तक पहुंचाने वाले एनएसयुआई जिला महासचिव अंकुश दुबे के साथ जिला कांग्रेस कमेटी के लक्ष्मीकांत दुबे, ब्रिजेश तिवारी,कनिष्क श्रीवास्तव, नफीस अहमद आदि दर्जनो कांग्रेसजनो ने दुध्दी तहसील के ग्राम लिलासी मे जाकर ग्रामीणो व लिलासी प्रकरण मे जेल मे बन्द सुकालो व किस्मतिया के परिवारजनो से मिले तथा प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली,अंकुश दुबे ने नए जारी प्रेस विग्यप्ति मे बताया कि उक्त समस्त रिपोर्ट रिसर्च सेल के चैयरमैन गौरव कपूर जी द्वारा राहुल गांधी तक भेजी जायेगी तथा किस्मतिया को मंजु नाम से गिरफ्तार कर अवैध तरीके से मिर्जापुर जेल मे बन्द रखा गया है जिसके विषय मे माननीय उच्च न्यायालय मे बन्दी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) रिट रोमा मलिक द्वारा दाखिल है व सुकालो की बेल अप्लीकेशन को सेशन कोर्ट से खारिज किया गया है जिसके लिये माननीय उच्च न्यायालय मे जमानत हेतु याचिका दाखिल करने की अग्रिम कार्यवाही होगी व समस्त प्रकरण सिविल प्रकृति का है तथा प्रशासन व वन विभाग द्वारा उक्त वन भूमि पर रसुखदारो द्वारा किये गये अवैध साखु, सागौन के वृक्षो के कटान को छिपाने हेतु आदिवासियों के उपरोक्त वन भूमि प्रकरण को क्रिमिनल नेचर का बनाकर फसाया गया है जबकि उसी वन भूमि पर एक रसुखदार भी कब्जा भी किये हुये है परन्तु वन विभाग मौन है तथा अपने सामुदायिक अधिकारो के प्रयोगार्थ जंगल जाने वाले आदिवासियों को पुलिसिया दमन द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है साथ ही साथ वन विभाग व जिला प्रशासन यदि आदिवासियो का हितैषी होता तो प्रथम दिन उपजे विवाद की स्थिति मे ही वन विभाग के आला अधिकारियों को साथ लेकर वनाधिकार कानुन और उक्त कानुन के तहत् प्रदत्त अधिकारो का स्पष्टीकरण कर मामला सुलझाया जा सकता था परन्तु अवैध कटान को आदिवासियों के मत्थे मढने के लिये एक रुपरेखा के तहत कार्यवाही की गयी है तथा आदिवासी वनवासी महासभा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद मे दाखिल जनहित याचिका मे न्यायालय द्वारा पारित आदेश मे स्पष्ट किया गया है कि ग्राम वनाधिकार समिति द्वारा अग्रसारगत किये गये दावे को उप मंडल समिति व जिला समिति खारिज करने से पुर्व एक बार दावेदारों को अवसर रखने का मौका देगी तथा अवसर रखने का मौका दिये बगैर व दावो का निस्तारण किये बगैर किसी भी आदिवासी की बेदखली व उत्पीडन नही किया जायेगा परन्तु इन सभी आदेशो को दरकिनार कर लगातार जिला प्रशासन द्वारा आदिवासीयो का उत्पीड़न किया जा रहा है गौरतलब है कि उपरोक्त वनाधिकार प्रकरण को लेकर 27 मार्च 2018 को भी अखिल भारतीय वनजन श्रमजीवी युनियन के पदाधिकारियों के साथ आदिवासियों का जत्था वन मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के आवास पर उनसे मिला था तथा वनाधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन नही होने की बाते भी रखी थी तथा ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति लिलासी कलां के अध्यक्ष नन्दु द्वारा वन मंत्री को 05 जुन, 2018 को प्रेषित पत्र मे भी बताया गया है कि उक्त कार्यवाही सुनियोजित तथा रसुखदारो को लाभ पहुंचाने व अवैध वृक्ष कटान को छिपाने हेतु की गयी है परन्तु दुर्भाग्य है कि वन मंत्री द्वारा आदिवासीयो के पत्र का संग्यान नही लिया गया है व पुर्व मे दिये गयी जानकारी पर नही कार्यवाही नही की गयी जिससे इतनी बडी घटना घटी जो दर्शाता है कि योगी सरकार व उसके मंत्री आदिवासियों के प्रति कितने लापरवाह है एवं प्रेषित रिपोर्ट में भी उक्त बाते राहुल गांधी जी तक भेजी गयी है तथा कांग्रेस पार्टी आदिवासी हितों को लेकर कटिबध्द है तथा सडक से लेकर संसद तक आदिवासियों की लडाई लडी जायेगी ग्रामीणों से मुलाकात के दरम्यान कहर विस्थापित नेता तथा कनहर भूमि अधिग्रहण को लेकर उच्च न्यायालय मे याचिकाकर्ता गम्भीरा प्रसाद, इदरीस अंसारी, लिलासी ग्राम प्रधान, ग्राम स्तरीय वन समिति लिलासी के अध्यक्ष तथा सैकडो ग्रामीण मौजुद रहे।









शनिवार, 11 अगस्त 2018

विश्व आदिवासी दिवस * 9 अगस्त, 2018*


*मेडरदह प्राथमिक विद्दालय पर धुम-धाम से हुआ विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन।
*मेडरदह मे आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम की थीम रही शिक्षित होकर,चलो पर्यावरण संरक्षण की ओर
*विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम मे छाया रहा माडल विद्दालयो के असंचालित होने का मुद्दा।
:-विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त पर पुरे विश्व मे आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के क्रम मे इस वर्ष कुलडोमरी के मेडरदह प्राथमिक विद्दालय पर विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन बडे धुम-धाम से सम्पन्न हुआ, इस वर्ष आयोजकों द्वारा कार्यक्रम की मुख्य थीम आदिवासी समाज के सामने व्याप्त शिक्षा समस्या को लेकर रखी गयी। कार्यक्रम का प्रारम्भ आदिवासी क्रान्तिकारी बिरसा मुंडा जी की तस्वीर का पारम्परिक तरीके से पुजन कर प्रारम्भ किया गया व अन्य आदिवासी पारम्परिक खेल तीरंदाजी तथा आदिवासी समाज के कलाकारों द्वारा लोकगीत व लोकनृत्यो का प्रस्तुतीकरण किया गया।
:-कार्यक्रम के उपरांत हुई सभा मे कार्यक्रम के आयोजक सामाजिक कार्यकर्ता हरिनाथ खरवार ने कहा कि जब तक आदिवासी समाज शिक्षित नही होगा तब तक आदिवासी समाज का वास्तविक विकास सम्भव नही है। कार्यक्रम के संचालक व बतौर वक्ता सहभागिता करने पहुंचे एनएसयूआई जिला महासचिव अंकुश दुबे ने कहा कि आदिवासी समाज के पिछड़ेपन का सबसे बडा कारण अशिक्षित होना है तथा दुर्भाग्य है कि कुलडोमरी मे स्थित माडल इण्टर कालेज मेडरदह व एकलव्य माडल आवासीय विद्दालय असंचालित है साथ ही साथ आदिवासियों के लिये निर्माणाधीन एकलव्य माडल आवासीय पिपरखांड मे 2 करोड का गबन भी हुआ परन्तु इसकी सूध लेने वाला कोई जन प्रतिनिधि नही है और सबसे बडा दुर्भाग्य यह है कि आज सभी जन प्रतिनिधि आदिवासी समाज से है तब भी यह स्थिति है कि आदिवासी तबका राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानुन के तहत् राशन लाभ तक प्राप्त नही कर पा रहा है बाकि बडे मुद्दों पर तो बोलना ही बेमानी होगी वही कार्यक्रम मे पहुंचे स्थानीय ग्रामीण शिवनारायण खरवार ने भी मंच पर अपनी पारम्परिक भाषा मे सर्वे सेटलमेंट के दरम्यान हुई गडबडियो व वनाधिकार के तहत् पट्टा आवंटन मे हुई धांधली की बातो को रखा। इस कार्यक्रम के अवसर पर मुकेश, रामसिंह, अमर सिंह खरवार, बबुआ राम खरवार, राजश्री खरवार, शिवनारायण खरवार, बिगन खरवार, समयलाल खरवार, शम्भू सिंह गोंड, दिनेश बारी आदि के साथ सैकडो ग्रामीण मौजूद रहे।