* बरसात के
उपरांत उत्पन्न होते है मच्छर व समुचे उर्जांचल मे होती है मलेरिया, डेंगु व अन्य
मच्छरजनित रोगो से जनधन कि हानि।
* मच्छररोधी
दवाओ के छिडकाव हेतु सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे के प्रेषित पर मुख्य
चिकित्साधिकारी, सोनभद्र ने अधिक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर को
किया था निर्देशित परन्तु नही हुआ छिडकाव।
:- उर्जांचल
की ग्राम पंचायतो समेत ककरी ग्राम पंचायत मे मच्छरोधी दवा के छिडकाव हेतु सामाजिक
कार्यकर्ता अंकुश दुबे द्वारा जिलाधिकारी,सोनभद्र को पत्र लिखकर मच्छररोधी दवा
छिडकाव की मांग की गई थी जिसके क्रम मे जिलाधिकारी,सोनभद्र द्वारा उपरोक्त पत्र को
मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र को हस्तान्तरित कीया गया था तथा मुख्य
चिकित्साधिकारी,सोनभद्र द्वारा अप्रैल माह मे ही अधिक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर
को उर्जांचल की ग्राम पंचायतो समेत ककरी मे मच्छररोधी दवा का छिडकाव सुनिश्चित
किये जाने हेतु निर्देशित किया गया था परन्तु किसी प्रकार के दवा का छिडकाव नही
हुआ तत्पश्चात अंकुश दुबे द्वारा पुनः 30 मई 2018 को जिलाधिकारी, सोनभद्र को
शिकायती पत्र जिसमे मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र के निर्देश के उपरांत भी
अधिक्षक, समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर द्वारा किटनाशक व मच्छररोधी दवाओ का
छिडकाव न करवाये जाने व ग्राम पंचायतो को मच्छररोधी दवाये उपलब्ध न कराये जाने का
वर्णन था प्रेषित किया था जिसके क्रम मे मुख्य
चिकित्साधिकारी, सोनभद्र द्वारा अधिक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र म्योरपुर
डा. राजीव रंजन की आख्या जिसमे अधिक्षक(सामु.स्वा.केन्द्र. म्योरपुर)द्वारा दवा के
छिडकाव हेतु अजय कुमार राय को निर्देशित किया गया था कि पत्रावली अंकुश दुबे को
प्रेषित की थी तथा दुरभाष के माध्यम से बताया था कि ककरी समेत सभी ग्राम पंचायतो
मे दवा कि छिडकाव जल्द करा दिया जायेगा अतः आपको पत्र लिखने की कोई आवश्यकता नही
है परन्तु सरकारी महकमे की लापरवाही देखिये दो माह उपरांत भी उर्जांचल की ग्राम
पंचायतो को मच्छररोधी दवा उपब्ध नही कराई गयी है तथा ना हि मच्छररोधी दवा का
छिडकाव हुआ है। मच्छररोधी व किटनाशक दवाईयो के मुख्य चिकित्साधिकारी,सोनभद्र के
निर्देश के बाद भी छिडकाव न होने पर अंकुश दुबे ने कहा कि उर्जांचल का दुर्भाग्य
है कि सारे काम कागजी पन्नो पर ही हो रहे है और जब मच्छररोधी दवा के छिडकाव जैसी
मुलभुत सूविधा ग्रामीणो को नही मिल पा रही है तो अब आगे कुछ आशा करना ही व्यर्थ है
और सबसे आश्चर्यजनक है कि सरकारी अधिकारी व महकमा ग्रामीणो के स्वास्थ्य व जनधन को
लेकर किस प्रकार लापरवाह है यह देखने और विचारणीय है साथ ही साथ ग्रामीण जनप्रतिनिधियो
के नकारेपन का प्रमाण है।




















