मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

छत्तीसगढ़ एसटी कमीशन के चैयरमैन ने औडी मे कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष मे की नुक्कड़ सभा।

 * भाजपा की सरकार में छीनी जा रही आदिवासियो की जमीन- भानु प्रताप सिंह(अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ एसटी कमीशन)


:- अनपरा नगर पंचायत के औडी में ओबरा के कांग्रेस प्रत्याशी रामराज सिंह गोंड के पक्ष में नुक्कड़ सभा करने आये छत्तीसगढ़ एसटी कमीशन के चैयरमैन भानु प्रताप सिंह कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। सभा को सम्बोधित करते हुये श्री सिंह ने कहा कि सुबे कि सरकार दलित आदिवासी किसान विरोधी है, इस सरकार में सोनभद्र के आदिवासी समुदाय की पुश्तैनी जोत कोड व कब्जे की जमीन छीनी जा रही है जबकि कांग्रेस की सरकार आदिवासियों को उनके जोत कोड व कब्जे की जमीन का अधिकार देने के लिये वनाधिकार कानुन लाई थी। उन्होने अनपरा शक्तिनगर क्षेत्र के विस्थापितों की रोजगार, प्रतिकर की समस्यायों पर कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने पर सबसे पहले हमने टाटा कम्पनी के लिये बस्तर में अधिग्रहित भूमियो को वहां के विस्थापितों को वापस करवाया तथा कांग्रेस सरकार ही विस्थापित हितैषी भूमि अधिग्रहण कानून 2013 लाई थी उन्होंने लोगो से ओबरा विधानसभा के प्रत्याशी रामराज गोंड को जीताने की अपील की और वादा किया की सरकार बनने पर सभी समस्याओं का निराकरण किया जायेगा। विधानसभा प्रत्याशी रामराज गोंड ने भाजपा सरकार को कोसते हुये कहा कि इस सरकार में तमाम औद्योगिक कम्पनियों के होते हुए भी यहां का नौजवान रोजगार को परेशान है श्री गोंड ने कहा कि अगर सम्मानित जनता उन्हें विधायक चुनकर विधानसभा भेजती है तो नौजवानों को स्थानीय कल कारखानों में रोजगार दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी। सभा का संचालन सचिव एनएसयुआई पुर्वी उत्तर प्रदेश अंकुश दुबे ने किया इस दरम्यान कांग्रेस जिलाध्यक्ष हाजी फरीद अहमद, एसटी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष समयलाल खरवार, कांग्रेस नेता पंकज मिश्रा, नगर कांग्रेस कमेटी अनपरा के अध्यक्ष ज्योति प्रकाश दुबे, नगर कांग्रेस कमेटी राबर्ट्सगंज अध्यक्ष राजीव त्रिपाठी, नगर कांग्रेस कमेटी ओबरा अध्यक्ष राकेश मिश्रा, पुर्व प्रधान औडी रनों देवी, कांग्रेस नेता ब्रजेश दुबे, मनोनीत रवि, श्याम बिहारी लक्ष्मीकांत दुबे, रामरक्षा दुबे, लालबाबु वर्मा, दया सागर दुबे, इसरार खान, शक्ति आनन्द कनौजिया, हरिनाथ खरवार, विकास यादव समेत सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
छत्तीगढ एसटी कमीशन के चैयरमैन माननीय भानु प्रताप सिंह जी के साथ कार्यक्रम के उपरान्त की तस्वीर।









अगर कोयला आधारित उर्जा उत्पादन बंद होगा तो क्या होगा ???

 • उर्जा उत्पादन के तरीको मे परिवर्तन के कारण कोयला खनन पर आश्रित समुदाय पर पडने वाले प्रभाव को जानने आई आईआईटी कानपुर की टीम।

:- कोयला आधारित उर्जा उत्पादन के कारण बडे पैमाने पर होने वाले प्रदुषण व कार्बन उत्सर्जन के कारण अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर व भारत मे भी कोयला जनित/आधारित उर्जा के उत्पादन के स्थान पर नवीकरणीय उर्जा उत्पादन जैसे सौर उर्जा आदि के क्षेत्र मे काम तेजी से चल रहा है। उर्जा उत्पादन की प्रक्रिया मे परिवर्तन के कारण कोयला खनन पर आश्रित समुदाय जैसे कोयला खनन मे कार्यरत मजदुर व कोयला खदान क्षेत्रो के आस-पास निवासरत व्यक्तियो के जीवन के सामाजिक-आर्थिक पहलु पर दुष्प्रभाव पडना सम्भावित है। उर्जा उत्पादन की प्रक्रिया मे परिवर्तन के कारण कोयला खनन पर आश्रित समुदायो के हितो पर पडने वाले सकारात्मक प्रभाव व नकारात्मक दुष्प्रभावो के आंकलन हेतु भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के मानविकी एवं समाज विज्ञान विभाग के डाक्टर प्रदीप स्वर्णकार के नेतृत्व मे सात्विक चतुर्वेदी(असिस्टेन्ट प्रोजेक्ट मैनेजर), नीशिकान्त(पीएचडी स्कालर), झुमुर दे(सिनियर प्रोजेक्ट असिसेटन्ट) व मनीषा दराल(प्रोजेक्ट एसोसियेट) की चार सदस्यीय टीम कोयला खनन पर आश्रित समुदाय/हितधारको के नीति प्रासंगिकता और समुदाय केन्द्रित सिफारिशो को विकसित करने के लिये खोजपुर्ण शोध करने व अनुसंधान/सर्वेक्षण हेतु उर्जांचल मे आई है। उक्त टीम के द्वारा एनसीएल के ककरी कोयला खदान क्षेत्र मे खनन संक्रियाओ से जुडे कार्यो मे कार्यरत संविदा मजदुरो व स्थाई कर्मचारियो समेत आस पास के गांव ककरी, रेहटा, चन्दुआर, कौहरौलिया आदि मे ग्रामीणो से उर्जा उत्पादन की प्रक्रिया मे परिवर्तन के कारण यदि कोयला खनन बन्द होता है तो उनके जीवन पर पडने वाले प्रभावो को लेकर साक्षात्कार किया गया। टीम के सदस्यो ने बताया कि किसी भी पारम्परिक प्रक्रिया मे परिवर्तन हेतु निर्णय लिये जाने के पुर्व उस पर आश्रित समुदाय का मत जानना अति आवश्यक है ताकि उस पर आश्रित समुदाय के हितो पर पडने वाले सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावो के मद्देनजर एक प्रभावी नीति विकसित की जा सके जिसके लिये यह सर्वेक्षण किया जा रहा है तथा हमारी टीम सर्वेक्षण, अनुसंधान के पश्चात प्राप्त आंकडो के आधार पर अपनी सिफारिश सम्बन्धितो को प्रेषित करेगी ताकि उर्जा उत्पादन की प्रक्रिया मे परिवर्तन अपनाने के पुर्व कोयला खनन पर आश्रित समुदाय के हित मे प्रभावी नीति विकसित की जा सके।