गुरुवार, 26 अगस्त 2021

रेनुसागर पावर डिवीजन द्वारा मालवाहको पर तिरपाल डालकर किये जा रहे राख के अभिवहन का मामला पहुंचा ओवरसाईट कमेटी के पास।

प्रदेश सचिव, एन.एस.यु.आई(पुर्वी, उत्तर प्रदेश) द्वारा चैयरमैन, ओवरसाईट कमेटी को इमेल के माध्यम से भेजी गयी शिकायत।









 जनपद-सोनभद्र के क्रिटिकली पाल्युटेड कलस्टर-अनपरा के औडी के टोला बिछड़ी में स्थित अपने राख बन्धे से रेनुसागर पावर डिवीजन द्वारा राख का अभिवहन मैकेनिकली कवर्ड वाहनों/बल्करो के स्थान पर खुले मालवाहकों पर तिरपाल बांधकर द्वारा किये जाने के दरम्यान उडने वाली राख से हो रहे वायु प्रदुषण व पर्यावरण को पहुंच रही क्षति व सार्वजनिक मार्ग के क्षतिग्रस्त होने का मामला माननीय हरित अधिकरण द्वारा गठित ओवरसाईट कमेटी के समक्ष जा पहुंचा है।अंकुश दुबे, प्रदेश सचिव, एन.एस.यु.आई(पुर्वी, उत्तर प्रदेश) द्वारा ओवरसाईट कमेटी के चैयरमैन को इस मामले मे शिकायती पत्र भेजा गया है। उन्होने अपने पत्र मे बताया है कि माननीय हरित अधिकरण द्वारा दिनांकः-28 अगस्त, 2018 को पारित आदेश मे ताप विद्युत गृहो को राख के अभिवहन के दरम्यान केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिसम्बर, 2013 मे जारी गाईडलाईन जिसमे सुस्पष्ट है कि राख का अभिवहन केवल मैकेनिकली कवर्ड वाहनों/बल्करो द्वारा किया जायेगा का अनुपालन करने का आदेश दिया है परन्तु रेनुसागर पावर डिवीजन द्वारा हरित अधिकरण के आदेश की अवमानना कर व गाईडलाईन के प्राविधानो का उल्लंघन कर खुले मालवाहको पर तिरपाल डालकर प्रतिदिन हजारो टन ओवरलोड राख का अभिवहन किया जा रहा है जिससे उडने वाली राख से वायु प्रदुषण हो रहा है तथा ओवरलोडिंग के कारण सार्वजनिक मार्ग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर गड्ढो मे तब्दील हो गया है। उन्होने रेनुसागर पावर डिवीजन व प्रदुषण विभाग के सम्बन्धित अधिकारियो के उपर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के एवज मे कार्यवाही तथा पर्यावरणीय क्षति वसुले जाने व क्षतिग्रस्त मार्ग की अविलम्ब मरम्मत कराने हेतु जिलाधिकारी-सोनभद्र को निर्देश जारी करने की मांग की है।

सोमवार, 23 अगस्त 2021

संविदा कार्यो मे श्रम नियोजन का अधिकार एन.सी.एल प्रबन्धन को दिये जाने की मांग।

कोयला मंत्री, भारत सरकार को पत्र भेज कान्ट्रैक्ट मैनुअल मैनेजमेन्ट, एन.आई.टी व पुर्नवास-पुर्नव्यवस्थापन नीति मे संशोधन कर प्राविधान सम्मिलित किये जाने की मांग।




 नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की परियोजनाओ मे संचालित संविदा कार्यो मे श्रम नियोजन/मजदुरो की भर्ती का अधिकार एन.सी.एल प्रबन्धन को दिये जाने हेतु कोल इण्डिया के कान्ट्रैक्ट मैनुअल मैनेजमेन्ट व पुर्नवास नीति तथा एन.सी.एल प्रबन्धन व संविदा कम्पनियो के मध्य संपादित होने वाले अनुबन्ध/एन.आई.टी मे संशोधन कर प्राविधान सम्मिलित किये जाने की मांग प्रह्वाद जोशी, कोयला मंत्री भारत सरकार को प्रदेश सचिव एनएसयुआई पुर्वी उत्तर प्रदेश अंकुश दुबे ने पत्र भेजकर की है।भेजे गये पत्र मे अनुसूचित जनजाति आयोग को एन.सी.एल मे संचालित संविदा कार्यो मे विस्थापितो को रोजगार दिये जाने हेतु प्रेषित पत्र के क्रम मे एन.सी.एल द्वारा दिये गये जवाब का हवाला देते हुये बताया गया है कि कि एन.सी.एल मे संचालित संविदा कार्यो मे श्रम नियोजन मे सीधा हस्तक्षेप एन.सी.एल प्रबन्धन द्वारा किये जाने सम्बन्धित सुस्पष्ट प्राविधान कोल इण्डिया के कान्ट्रैक्ट मैनुअल मैनेजमेन्ट व पुर्नवास नीति तथा एन.सी.एल प्रबन्धन व संविदा कम्पनियो के मध्य संपादित होने वाले अनुबन्ध/एन.आई.टी मे नही है जिसके कारण एन.सी.एल प्रबन्धन संविदा कार्यो मे सृजित रोजगार इन कोयला खदानो हेतु किये गये भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवार के सदस्यो को उपलब्ध कराने मे अक्षम शाबित हो रहा है व विस्थापितो को रोजगार नही मिल पा रहा है जिसके कारण विस्थापितो के समक्ष जिविकोपार्जन का संकट व्याप्त है। महत्वपुर्ण है कि कोल इण्डिया की पुर्नवास-पुर्नव्यवस्थापन नीति-2012 के धारा-13 मे अनुषंगी कम्पनी जो यहां एन.सी.एल है को अधिकार प्राप्त है कि वह पुर्नवास-पुर्नव्यवस्थापन नीति-2012 मे जरुरी व आवश्यक सूधार कर सकती है। इसलिये संविदा कार्यो मे श्रम नियोजन/मजदुरो की भर्ती का अधिकार एन.सी.एल प्रबन्धन को दिये जाने हेतु कोल इण्डिया के पुर्नवास नीति व कान्ट्रैक्ट मैनुअल मैनेजमेन्ट तथा एन.सी.एल प्रबन्धन व संविदा कम्पनियो के मध्य संपादित होने वाले अनुबन्ध/एन.आई.टी मे संशोधन कर सुस्पष्ट व विस्थापित हितैषी प्राविधान सम्मिलित किया जाये।