· वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के पत्र
संख्याः-जे11013/5/2010आईए
द्वितीय(प्रथम), दिनांकः-15 मार्च, 2010
मे उत्तर प्रदेश के जनपदः-सोनभद्र के अधीन पडने वाले 1)-डाला टोला, 2)-ओबरा, 3)-रेनुकुट, 4)-अनपरा,
5)-रेनुसागर, 6)-ककरी, 7)-दुध्दीचुंआ,
8)-बीना, 9)-खडिया, 10)-शक्तिनगर,
11)-रिहन्द नगर, 12)-बीजपुर को क्रिटिकली पाल्युटेड इन्डस्ट्रियल एरिया व कलस्टर के रुप चिन्हित करते हुये कार्यालय ग्याप जारी किया गया।
· राष्ट्रीय हरित न्याधिकरण, नई दिल्ली द्वारा
मुल प्रार्थना पत्र संख्याः-20/2014, जगत नारायन विश्वकर्मा व
अन्य बनाम यूनियन आफ ईण्डिया मे पारित आदेश दिनांकः-13.05.2014 के अनुपालन मे
जिलाधिकारी, सोनभद्र के अध्यक्षता मे दिनांकः-18.05.2014 को हुई बैठक मे क्षेत्रीय
अधिकारी(सोनभद्र), उ.प्र.प्र.नि.बो. द्वारा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार,
नई दिल्ली के पत्र संख्याः-जे11013/5/2010आईए
द्वितीय(प्रथम), दिनांकः-15 मार्च, 2010 मे जारी कार्यालय ग्याप मे जनपदः-सोनभद्र
मे चिन्हित क्रिटिकली पाल्युटेड इन्डस्ट्रियल एरिया 1)-डाला टोला, 2)-ओबरा, 3)-रेनुकुट, 4)-अनपरा, 5)-रेनुसागर, 6)-ककरी,
7)-दुध्दीचुंआ, 8)-बीना, 9)-खडिया, 10)-शक्तिनगर, 11)-रिहन्द
नगर, 12)-बीजपुर कलस्टर के प्रभाव मे
आने वाले ग्रामो की सूची प्रस्तुत की जिसे क्षेत्रीय अधिकारी(सोनभद्र),
उ.प्र.प्र.नि.बो., अधिशासी अभियन्ता सोनभद्र, जल निगम, उप-जिलाधिकारी
राबर्टसगंज(सोनभद्र), उप-जिलाधिकारी दुध्दी(सोनभद्र) द्वारा जाचोपरांत जारी किया
गया।
1.
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार, नई
दिल्ली के पत्र संख्याः-जे11013/5/2010आईए
द्वितीय(प्रथम), दिनांकः-15 मार्च, 2010 मे जारी कार्यालय ग्याप मे जनपदः-सोनभद्र
मे चिन्हित क्रिटिकली पाल्युटेड इन्डस्ट्रियल एरिया व कलस्टर-रेणुसागर(जिसमे
सम्मिलित ग्रामः-परासी, गरबन्धा), कलस्टरः-ककरी(जिसमे सम्मिलित ग्राम-
ककरी, रेहटा, बांसी), कलस्टर- बीना(जिसमे सम्मिलित ग्राम-
जमशिला, बरवानी, चन्दुआर,घरसडी, कौहरौल, कौहरलिया, मिसिरा, भैरवा, योगीचौरा,
मर्रक) ,कलस्टर- खडिया(जिसमे सम्मिलित ग्राम- खडिया,
चिल्काटांड,परसवार राजा), कलस्टर-शक्तिनगर(जिसमे सम्मिलित ग्राम-
परसवार चौबे, रानीबारी, बडवाभटवारी, कोटा) जिनकी सूची जिलाधिकारी, सोनभद्र
व उत्तर प्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से माननीय हरित अधिकरण मे आवेदन
संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ
ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत नारायन
विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व माननीय उच्च न्यायालय, ईलाहाबाद मे
उत्तर प्रदेश मे डीएमएफ ट्रस्ट के गठन को लकेर दाखिल जनहित याचिका संख्याः-51929/2016, सहयोग व अन्य बनाम युनियम आफ इण्डिया व 3 अन्य मे अपने प्रतिशपथ
पत्र(काउन्टर ऐफिटेविट) मे दाखिल की गयी है उपरोक्त गम्भीर प्रदुषण प्रभावित
क्षेत्रो मे शुध्द पेयजल उपलब्ध कराये जाने के बाबत् दिनांकः-13.05.2014 को माननीय
हरित अधिकरण द्वारा उपरोक्त आवेदन के क्रम मे पारित अपने आदेश के बिन्दु क्रमांक a, b, c, d,e,f मे निम्नवत आदेश पारित
किया-
a) The States of Uttar
Pradesh and Madhya Pradesh shall ensure that pure drinking water, free from any
contamination is available to all the people living in the area defined as
critically polluted area forthwith.
b) The State of Uttar
Pradesh and Madhya Pradesh shall provide this water through tankers immediately
and Report to the Tribunal that drinking water is made available to the
residents of the area on the next date of hearing.
c) On the basis of
Doctrine of “Polluter Pays”, we hereby direct the Chief Secretaries of State of
Uttar Pradesh and State of Madhya Pradesh to direct all the large industries
operating in that area including and particularly the thermal power plants to
provide, install and commission RO (Reverse Osmosis) plants of reasonable capacity
commensurate with the local demands in order to ensure supply of uncontaminated
drinking water to all the affected villages which are located in the critically
polluted areas.
d) For this purpose
the said State Governments shall within one week from today communicate to each
of these industries their obligation to discharge their Corporate Social
Responsibility and accordingly direct them to provide, install, commission such
prescribed numbers of RO plants commensurate with local demand/population at
the places earmarked by the Officers of the Government in each village situated
in critically polluted areas.
e) Cost of such plants
shall be borne by these industries in advance and/or get such plants installed
within two weeks after the intimation is given by the State Governments. In the
event of default the State Pollution Control Board and the Central Pollution
Control Board both or any of them may serve Notice for closure upon the
informed industries as per the above terms.
f) These ROs shall be
maintained and operated by the respective industries in collaboration with the
beneficiaries i.e. the residents of the Villages. However, the operations shall
be monitored by the SPCB and the SDM in-charge of the area and they shall
ensure that ROs are in operation and are providing uncontaminated drinking
water.
दिनांकः-06.12.2017
को मानननीय हरित अधिकरण द्वारा उपरोक्त आवेदन के क्रम मे पारित अपने आदेश के
बिन्दु क्रमांक 6, 9 व 11 मे निम्नवत आदेश पारित किया –
6. We direct that the Member Secretary of
the respective State Pollution Control Boards, the District Magistrate of the
concerned district and the Director/Partner/Executive Officer of the industry thermal plant shall ensure that every village in the region of
Singrauli region including coal mining area, every village is provided with an
RO plant and if the population of the village so demands at least two or even
more plants shall be provided in that village to ensure that residents of the
village get potable water for drinking purposes at any cost. All the industries
shall be liable to bear the cost in discharge of their corporate social
responsibility as well as on the fact that the existing pollution is
attributable to them in one way or the other. The Principle of polluter pays
has to be invoked but we make it clear that at this stage we are not returning
the findings that these industries are causing pollution, as of now. We will
leave it to the inspection team to return their findings in that behalf with
complete analysis report.
9. For installation of
RO plant, land would be provided by the Government/Gram Panchayat and entire
cost for installation or maintenance would be borne by the industries.
11. All the stone
crushers which are operating in these regions without obtaining consent of the
Board and permission from the competent authority shall be shut down without
further notice. The stone crusher which are permitted to operate would also be
responsible for installation of RO system at the place where there are number
of stone crushers running and they would be guided by the same directions as we
have afore-recorded in the case of industries
कोर कमेटी
द्वारा माननीय हरित अधिकरण को उपरोक्त प्रकरण के संर्दर्भ मे प्रस्तुत अपनी
विस्तृत रिपोर्ट दिनांकः- 20.08.2015 मे शुध्द पेयजल उपलब्ध कराये जाने हेतु जिला
प्रशासन व सम्बन्धित राज्य सरकारो के स्तर पर किये जाने हेतु निम्नवत अनुशंसा की
सिफारिश की गयीः-
9.7.2 Fluoride affected villages must be supplied
with safe drinking water ( RO Treated water ) under the supervision
of the District Administration. All the tube wells supplying contaminated water
should carry boards informing public not to use the same for drinking purposes.
The concerned Dept. (Irrigation/ Jal Nigam) of the State Administration should submit compliance report to Regional
Office of MoEF& CC every month.The maintenance of these RO systems along
with education of residents about proper method and
benefits of RO water needs to be ensured.
9.7.3 The concerned Dept. (Irrigation/ Jal Nigam)
of the State Administration shall also ensure proper disposal of the RO
rejects, so as not to affect the ground water and surface water streams and the
soil of the area
कोर कमेटी
द्वारा माननीय हरित अधिकरण को उपरोक्त प्रकरण के संर्दर्भ मे प्रस्तुत अपनी
विस्तृत रिपोर्ट दिनांकः-27 मार्च 2018 मे पर्यावरण सरंक्षण एवं प्रदुषण नियंत्रण
हेतु कीये गये संस्तुतियो मे जिला प्रशासन व सम्बन्धित राज्य सरकारो के स्तर पर
किये जाने हेतु निम्नवत अनुशंसा की सिफारिश की गयीः-
(VII)
District Administration of respective States
c)
Since there is no strategy for disposal of the RO reject in an environmentally friendly manner, prevailing practice of dumping of RO reject shall affect nearby land as well as
water resources with long term consequences leading to
irreversible ecological damage. Therefore no
further installation of RO plants in affected villages is recommended. Instead water supply should now be practiced using water tankers as an interim measure. Piped water
supply from Rihand reservoir will be a long term solution
for drinking water supply to fluoride and mercury affected villages.
समक्ष, दिनांकः- 24 अक्टुबर, 2018
मा.
न्यायमुर्ति श्री राजेश कुमार
चेयरमैन,
ओवरसाईट कमेटी
(कैम्प-सोनभद्र)
(NATIONAL GREEN
TRIBUNAL, PRINCIPAL BENCH, NEW DELHI द्वारा O.A NO. 164/2018 IN THE MATTER
OF Ashwani kumar dubey VS. Union of india & Ors. मे दिनांकः-28
अगस्त, 2018 को पारित आदेश के मे गठित ओवरसाईट कमेटी)
fo"k;%- जनपद-सोनभद्र
के अर्न्तर्गत नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की विभिन्न कोयला खदान परियोजनाओ के कोयला
खनन तथा अनपरा तापीय परियोजना, रेनुसागर पावर डिवीजन आदि परियोजनाओ के परिचालन
हेतु व कोयला/खनिजो व अन्य औद्दोगिक वस्तुओ के अभिवहन से जनित दुष्प्रभावो से
प्रभावित तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार व उत्तर प्रदेश प्रदुषण
नियंत्रण बोर्ड व जिला प्रशासन, सोनभद्र द्वारा क्रिटिकली प्रदुषण प्रभावित
क्षेत्र के रुप मे चिन्हित कलस्टरः-ककरी के अर्न्तर्गत आने वाले ग्राम
पंचायतः-ककरी, रेहटा व बांसी तथा कलस्टरः-रेणुसागर के अर्न्तर्गत आने वाले
ग्राम पंचायतः-परासी, गरबन्धा मे माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली
द्वारा आवेदन संख्या-276/2013
अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य मे गठित
कोर कमेटी द्वारा मननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष दाखिल विस्तृत रिपोर्ट/अनुशंसा दिनांकः-20.08.2015 व माननीय हरित
अधिकरण के आदेश दिनांकः-06
दिसम्बर 2017
के अनुपालन मे कोर कमेटी द्वारा मननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष दाखिल विस्तृत
रिपोर्ट/अनुशंसा दिनांकः-27.03.2018 के अनुसार उत्तर
प्रदेश जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास (डीएमएफ) के मद
से डीएमएफ नियामवली-2017 के प्रस्तरः-17(क) के प्राविधानानुसार प्राथमिकता के आधार
पर क्रियान्वित किये जाने वाले कार्यो के अर्न्तर्गत जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास,
सोनभद्र के मद से प्रत्येक कलस्टर मे पृथक-पृथक उच्च
क्षमता का एकीकृत जल शोधन संयंत्र स्थापित कर शिघ्रता-शिघ्र घर-घर पाईप लाईन के
माध्यम से पेयजल आपुर्ति किये जाने राज्य सरकार उत्तर प्रदेश व जिलाधिकारी सोनभद्र
को निर्देशित किये जाने तथा अपनी अनुशंसा मे सम्मिलित किये जाने बाबत्।
egksn;]
उपरोक्त विषयार्न्तर्गत आपको अवगत् कराना
है कि जनपद-सोनभद्र
के विकास खण्ड म्योरपुर अन्तर्गत ग्राम पंचायत- ककरी, रेहटा व बांसी
एनसीएल की ककरी कोयला खदान व रिहन्द जलाशय तथा ग्राम पंचायतः-परासी व
गरबन्धा अनपरा तापीय परियोजना व रेनुसागर पावर डिवीजन से घिरा हुआ है व
एनसीएल ककरी के कोयला खनन एवं अनपरा तापीय परियोजना व रेनुसागर पावर डिविजन की
कोयला आधारित ताप विद्दुत परियोजनाओं के परिचालन हेतु कोयला व अन्य औद्दोगिक खनिजो
के अभिवहन,
विद्दुत उत्पादन व राख के अभिवहन के साथ-साथ अन्य खनन व औद्योगिक
गतिविधियों के कारण ग्राम पंचायत- ककरी, रेहटा व बांसी तथा ग्राम
पंचायतः-परासी, गरबन्धा, गम्भीर रूप से प्रदूषित है जिसकी पुष्टि माननीय
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा आवेदन संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे बनाम
युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत
नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया मे आदेश दिनांकः-13.05.2014 के
अनुपालन हेतु जिलाधिकारी, सोनभद्र की अध्यक्षता मे दिनांकः-18.05.2014 को हुई बैठक
के बाबत् जारी कार्यवृत्त मे क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली के पत्र संख्याः-जे 11013/5/2010आईए द्वितीय(प्रथम), दिनांकः-15 मार्च, 2010
तथा उसके साथ संलग्न क्रिटिकली पाल्युटेड एरिया के 12 कलस्टर व उक्त कलस्टर के
अर्न्तर्गत आने वाले क्षेत्रो/टोलो/मजरो/राजस्व ग्रामो की सूची से होती है जिसमे ग्राम पंचायतः- ककरी, रेहटा
व बांसी, ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा
रेणुसागर कलस्टर के अर्न्तर्गत आता है।
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई
दिल्ली द्वारा सिंगरौली-सोनभद्र क्षेत्र मे व्याप्त प्रदुषण के बाबत् गठित कोर
कमेटी द्वारा एनजीटी के समक्ष दाखिल अपनी विस्तृत रिपोर्ट/अनुंशसा
दिनांकः-20.08.2015 को गम्भीर प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र जिसमे ग्राम पंचायतः-
ककरी, रेहटा व बांसी, ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत तथा ग्राम
पंचायतः-परासी व गरबन्धा, रेणुसागर कलस्टर के अर्न्तर्गत आता है मे
पेयजल मे व्याप्त प्रदुषण व निहित विषाक्त तत्वो को लेकर निम्नवत टिप्पणी व
अनुशंसा की गई हैः-
5.2.19 The quality of
groundwater is found deteriorated in terms of trace metals,
nitrate and fluoride. Concentration of fluoride exceeded the desirable
limit prescribed by BIS (2012) in the samples collected from Govindpur,
Kusmaha, Kakri, Harrahwa, Khairi, Naktu,
Sirsoti, Chilkadand, Pasavar raja, and Dibulgang.
Concentration of mercury exceeded in the samples collected
from Kirwani, Parasi, Harrahwa, Naktu, Sirsoti,
Chilkadand, Parsavar-raja, Govindpur, Kusmaha, Khairahi,
Jayant Colony, Jaitpur, MPCC colony, and Dibulganj
9.7.2 Fluoride affected villages must be
supplied with safe drinking water ( RO Treated water ) under the supervision of
the District Administration. All the tube wells supplying contaminated water
should carry boards informing public not to use the same for drinking purposes.
The concerned Dept. (Irrigation/ Jal Nigam) of the State Administration should
submit compliance report to Regional Office of MoEF& CC every month.The
maintenance of these RO systems along with education of residents about proper
method and benefits of RO water needs to be ensured.
9.7.3 The concerned Dept.
(Irrigation/ Jal Nigam) of the State Administration shall also ensure proper
disposal of the RO rejects, so as not to affect the ground water and surface
water streams and the soil of the area
व माननीय
राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली द्वारा आवेदन संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे बनाम
युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत
नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य मे जनपदः-सोनभद्र के क्रिटिकली
प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र के रुप मे चिन्हित ग्रामो/टोलो/मजरो जिसमे ग्राम पंचायतः- ककरी, रेहटा व बांसी,
ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा, रेणुसागर
कलस्टर के अर्न्तर्गत सम्मिलित है मे शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु दिनांकः-13.05.2014 को पारित
आदेश मे निम्नवत आदेश दिये थेः-
a) The States of Uttar
Pradesh and Madhya Pradesh shall ensure that pure drinking water, free from any
contamination is available to all the people living in the area defined as
critically polluted area forthwith.
b) The State of Uttar
Pradesh and Madhya Pradesh shall provide this water through tankers immediately
and Report to the Tribunal that drinking water is made available to the
residents of the area on the next date of hearing.
c) On the basis of
Doctrine of “Polluter Pays”, we hereby direct the Chief Secretaries of State of
Uttar Pradesh and State of Madhya Pradesh to direct all the large industries
operating in that area including and particularly the thermal power plants to
provide, install and commission RO (Reverse Osmosis) plants of reasonable
capacity commensurate with the local demands in order to ensure supply of
uncontaminated drinking water to all the affected villages which are located in
the critically polluted areas.
d)
For this purpose the said State Governments shall within one week from today
communicate to each of these industries their obligation to discharge their
Corporate Social Responsibility and accordingly direct them to provide,
install, commission such prescribed numbers of RO plants commensurate with
local demand/population at the places earmarked by the Officers of the
Government in each village situated in critically polluted areas.
साथ ही साथ माननीय
राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली द्वारा आवेदन संख्या-276/2013
अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य मे जनपदः-सोनभद्र
के क्रिटिकली प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र के रुप मे चिन्हित ग्रामो/टोलो/मजरो जिसमे ग्राम पंचायतः- ककरी, रेहटा व
बांसी, ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा, रेणुसागर
कलस्टर के अर्न्तर्गत सम्मिलित है मे पेयजल आपुर्ति हेतु दिनांकः-06 दिसम्बर 2017
को पारित आदेश के बिन्दु क्रमांक 6, 9 व 11 मे निम्नवत
आदेश दिये हैः-
6. We direct that the Member Secretary of the respective
State Pollution Control Boards, the District Magistrate of the concerned
district and the Director/Partner/Executive Officer of the industrythermal
plant shall ensure that every village in the region of Singrauli region
including coal mining area, every village is provided with an RO plant and if
the population of the village so demands at least two or even more plants shall
be provided in that village to ensure that residents of the village get potable
water for drinking purposes at any cost. All the industries shall be liable to
bear the cost in discharge of their corporate social responsibility as well as
on the fact that the existing pollution is attributable to them in one way or
the other. The Principle of polluter pays has to be invoked but we make it
clear that at this stage we are not returning the findings that these
industries are causing pollution, as of now. We will leave it to the inspection
team to return their findings in that behalf with complete analysis report.
9. For installation of RO plant, land
would be provided by the Government/Gram Panchayat and entire cost for
installation or maintenance would be borne by the industries.
11. All the stone crushers which are operating
in these regions without obtaining consent of the Board and permission from the
competent authority shall be shut down without further notice. The stone
crusher which are permitted to operate would also be responsible for
installation of RO system at the place where there are number of stone crushers
running and they would be guided by the same directions as we have
afore-recorded in the case of industries. ijUrq
lEcfUèkrks@vfèkdkjh;ks }kjk euekuh djrs gq;s xzke iapk;r%&ddjh
dks iqoZ ls ikbi ykbu ls vkPNkfnr fn[kkrs gq;s Hkzked fjiksVZ yxkdj xzke
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वर्तमान
मे माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली द्वारा आवेदन संख्या-276/2013
अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य मे आदेश
दिनांकः-06 दिसम्बर 2017 के अनुपालन मे कोर कमेटी द्वारा एनजीटी के समक्ष दाखिल
अपनी विस्तृत रिपोर्ट/अनुशंसा दिनांकः-27.03.2018 मे जनपदः-सोनभद्र के क्रिटिकली प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र के रुप मे
चिन्हित ग्रामो/टोलो/मजरो जिसमे
ग्राम पंचायतः- ककरी, रेहटा व
बांसी, ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत तथा ग्राम पंचायतः-परासी
व गरबन्धा, रेणुसागर कलस्टर के अर्न्तर्गत सम्मिलित है मे उत्तर
प्रदेश सरकार के जिला प्रशासन, सोनभद्र को पाईप लाईन आधारित पेयजल व्यवस्था
निर्मित कर पेयजल आपुर्ति हेतु निम्नवत निर्देश दिए गये हैः-
c) Since there is no
strategy for disposal of the RO reject in an environmentally
friendly manner, prevailing practice of dumping of RO reject
shall affect nearby land as well as water resources with long term consequences leading to irreversible
ecological damage. Therefore no further installation of RO
plants in affected villages is recommended. Instead water
supply should now be practiced using water tankers as an interim
measure. Piped water supply from Rihand reservoir will be a long term
solution for drinking water supply to fluoride and mercury
affected villages.
*भारत
सरकार द्वारा एमएमडीआर अधिनियम 2015 बनाकर खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों को और
स्थानों के सामाजिक तथा आर्थिक उन्नयन के लिए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण
योजना बनाया गया। जिसमें राज्य सरकारों को खनन प्रभावित जिलों में जनपद खनिज
फाउन्डेशन के गठन हेतू निर्देश जारी किया गया था। जनपद खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट का
उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक और कल्याणकारी परियोजनाओं
का क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण
नियंत्रण, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं खनन
प्रभावित क्षेत्र में निवासरत लोगों के सामाजिक, आर्थिक
स्थिति को सुदृढ़ करते हुए दीर्घकालीन टिकाऊ आजीवका सुनिश्चित करना है। महत्वपूर्ण
है कि ग्राम पंचायत- ककरी, रेहटा, बांसी, परासी नार्दर्न कोलफील्डस
लिमिटेड की ककरी परियोजना द्वारा व ग्राम पंचायतः-परासी तथा गरबन्धा,
रेनुसागर पावर डिवीजन द्वारा अधिग्रहित है तथा एनसीएल के कोयला खनन एवं अनपरा
तापीय परियोजना तथा रेनुसागर पावर डिवीजन के परिचालन हेतु कोयला व अन्य औद्दोगिक
खनिजो के अभिवहन से होने वाले प्रदूषण/दुष्प्रभाव से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से
प्रभावित है जहाँ प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना व उ0प्र0 जिला खनिज
फाउन्डेशन न्यास, नियमावली 2017 के प्राविधानुसार
डीएमएफ के मद में प्राप्त राशि प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न विकास कार्य हेतू
व्यय किये जाने/आवंटित किये जाने का प्राविधान है। जनपद-सोनभद्र के डीएमएफ मद में
नार्दर्न कोलफील्डस लिमिटेड द्वारा कोयला खनन के सापेक्ष प्रति टन रायल्टी की दर
का 30 व कोयला आधारित तापीय विद्दुत परियोजनाओं के संचालन प्रतिशत हिस्सा दिया जा
रहा है। जो धन नियमानुसार एनसीएल की कोयला खदानों में कोयला खनन/अभिवहन से
प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र तथा भूमि अर्जन, पुर्नवासन
और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के तहत
प्रभावित परिवार और विस्थापित परिवार के रूप में चिन्हित परिवार और ग्रामसभा के मशविरे
से चिन्हित अन्य परिवार जहां निवासरत हैं, ऐसे क्षेत्रों के
अर्न्तर्गत ग्राम पंचायतः- ककरी, रेहटा, बांसी, परासी, गरबन्धा भी सम्मिलित है मे शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु उत्तर प्रदेश जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास
नियमावली-2017 के प्रस्तर
17 के बिन्दु क्रमांक (क) के जो कि निम्नवत हैः- “(क) पेयजल
आपुर्तिः-केन्द्रीकृत निर्मलीकरण प्रणाली, जल उपचार संयंत्र, स्थाई/अस्थाई जल
वितरण नेटवर्क, जिसमे शुध्द पेयजल की आपुर्ति हेतु जल पाईप बिछाने की अच्छी सूविधा
सम्मिलित हो”
के प्राविधान है के अनुसार खनन व प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र मे शुध्द पेयजल
आपुर्ति उच्च प्राथमिकता के आधार पर कराये जाने वाले कार्यो मे सम्मिलित है जिसमे
जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास निधी की राशि के कम से कम 60 प्रतिशत राशि को व्यय किया
जाना है।
अतः
श्रीमान जी से आग्रह है कि जनपदः-सोनभद्र के विकासखण्डःम्योरपुर की ग्राम
पंचायतः-ककरी, रेहटा व बांसी तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा जो कि वन
एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार व उत्तर प्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड व जिला
प्रशासन, सोनभद्र द्वारा क्रिटिकली प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र के रुप मे चिन्हित
ग्रामो/टोलो/मजरो मे क्रमशः ककरी कलस्टर व रेमुसागर
कलस्टर के अर्न्तर्गत सम्मिलित है मे शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु माननीय राष्ट्रीय
हरित अधिकरण, नई दिल्ली द्वारा आवेदन संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे
बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत
नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य मे आदेश दिनांकः-06
दिसम्बर 2017 के अनुपालन मे कोर कमेटी द्वारा एनजीटी के समक्ष दाखिल अपनी विस्तृत
रिपोर्ट/अनुशंसा दिनांकः-27.03.2018 मे उत्तर प्रदेश सरकार
के जिला प्रशासन, सोनभद्र को दिये गये निर्देशो के बिन्दु क्रमांक (c) व उत्तर प्रदेश जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास नियमावली-2017 के
प्रस्तरः-17(क) के प्राविधानानुसार जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास(डीएमएफ) के मद से
ग्राम पंचायतः- ककरी, रेहटा व बांसी जो कि ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत आता है तथा
ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा जो कि रेणुसागर कलस्टर के अर्न्तर्गत आता है मे
प्रत्येक कलस्टर मे पृथक-पृथक एकीकृत उच्च क्षमत का जल शोधन संयंत्र स्थापित कर
घर-घर पाईप लाईन के माध्यम से पेयजल आपुर्ति किये जाने हेतु राज्य सरकार उत्तर
प्रदेश तथा जिलाधिकारी, सोऩबद्र को निर्देशित करने का कष्ट करे ताकि माननीय हरित
अधिकरण के निर्देशो का अनुपालन व उत्तर प्रदेश जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास
नियमावली-2017 के उद्देश्यो की पुर्ति सुनिश्चित हो सके व गम्भीर प्रदुषण प्रभावित
कलस्टर-ककरी व कलस्टरः-रेणुसागर के अर्न्तर्गत आने वाले ग्राम
पंचायतः- ककरी, रेहटा व बांसी तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा के
ग्रामीणो(रहवासियो) को शुध्द पेयजल की आपुर्ति सुनिश्चित हो सके।
भवदीय
(अंकुश कुमार
दुबे)
एनएसयुआई
जिलामहासचिव
मो.न.-08299427914
इमेलः-Ankushdubey63@gmail.com
संलग्नकः-
1.
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा के आदेश
दिनांकः-13.05.2014 के अनुपालन हेतु जिलाधिकारी, सोनभद्र की अध्यक्षता मे
दिनांकः-18.05.2014 को हुई बैठक के बाबत् जारी कार्यवृत्त मे क्षेत्रीय अधिकारी,
प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली के पत्र
संख्याः-जे 11013/5/2010आईए द्वितीय(प्रथम), दिनांकः-15 मार्च, 2010
तथा उसके साथ संलग्न क्रिटिकली पाल्युटेड एरिया के 12 कलस्टर व उक्त कलस्टर के
अर्न्तर्गत आने वाले क्षेत्रो/टोलो/मजरो/राजस्व ग्रामो की सूची कि छायाप्रति।
2.
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली
द्वारा सिंगरौली-सोनभद्र क्षेत्र मे व्याप्त प्रदुषण के बाबत् गठित कोर कमेटी
द्वारा एनजीटी के समक्ष दाखिल अपनी विस्तृत रिपोर्ट/अनुंशसा दिनांकः-20.08.2015
कि छायाप्रति।
3.
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली
द्वारा आवेदन संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन
संख्या-20/2014 जगत नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ
ईण्डिया व अन्य मे जनपदः-सोनभद्र के क्रिटिकली प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र के रुप मे
चिन्हित ग्रामो/टोलो/मजरो जिसमे ग्राम
पंचायतः-ककरी,रेहटा व बांसी तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा भी सम्मिलित है मे शुध्द
पेयजल आपुर्ति हेतु दिनांकः-13.05.2014 को पारित आदेश कि छायाप्रति।
4.
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली
द्वारा आवेदन संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन
संख्या-20/2014 जगत नारायन विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ
ईण्डिया व अन्य मे जनपदः-सोनभद्र के क्रिटिकली प्रदुषण प्रभावित क्षेत्र के रुप मे
चिन्हित ग्रामो/टोलो/मजरो जिसमे ग्राम
पंचायतः-ककरी, रेहटा व बांसी तथा ग्राम पंचायतः-परासी व गरबन्धा भी सम्मिलित है मे
शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु दिनांकः-06.12.2017 को पारित आदेश कि छायाप्रति।
5.
वर्तमान मे माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई
दिल्ली द्वारा आवेदन संख्या-276/2013 अश्वनी कुमार दुबे बनाम युनियन आफ
ईण्डिया व अन्य तथा आवेदन संख्या-20/2014 जगत नारायन
विश्वकर्मा व अन्य बनाम युनियन आफ ईण्डिया व अन्य मे आदेश दिनांकः-06 दिसम्बर 2017
के अनुपालन मे कोर कमेटी द्वारा एनजीटी के समक्ष दाखिल अपनी विस्तृत रिपोर्ट/अनुशंसा दिनांकः-27.03.2018 मे जनपदः-सोनभद्र के क्रिटिकली प्रदुषण
प्रभावित क्षेत्र के रुप मे चिन्हित ग्रामो/टोलो/मजरो जिसमे ग्राम पंचायतः-ककरी, रेहटा व बांसी तथा ग्राम पंचायतः-परासी व
गरबन्धा भी सम्मिलित है मे उत्तर प्रदेश सरकार के जिला प्रशासन, सोनभद्र को पाईप
लाईन आधारित पेयजल व्यवस्था निर्मित कर पेयजल आपुर्ति हेतु दिये गये निर्देश कि
छायाप्रति।
6.
उ0प्र0 जिला खनिज फाउन्डेशन न्यास, नियमावली
2017 कि छायाप्रति।
प्रतिलिपीः-
·
जिलाधिकारी महोदय/अध्यक्ष,
जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास को इस आग्रह के साथ प्रेषित की अपने
स्तर पर पर जनपद-सोनभद्र मे स्थित एनसीएल की कोयला खदानो के से कोयला खनन व कोयला
आधारित तापीय विद्दुत परियोजनाओ(अनपरा तापीय परियोजना, रेनुसागर पावर डिवीजन) के
परिचालन हेतु कोयला अभिवहन व अन्य औद्दोगिक खनिजो के अभिवहन से जनित प्रदुषण के
दुष्प्रभाव से प्रभावित गम्भीर प्रदुषण प्रभावित(क्रिटकली पाल्युटेड एरिया) के
अर्न्तर्गत चिन्हित ककरी कलस्टर के अर्न्तर्गत आने वाले ग्राम
पंचायत-ककरी,रेहटा,बांसी व कलस्टरः-रेणुसागर के अर्न्तर्गत आने वाले ग्राम
पंचायतः-परासी, गरबन्धा मे एकीकृत उच्च क्षमता का जल शोधन संयत्र स्थापित कर
पाईप लाईन के माध्यम से शुध्द पेयजल आपुर्ति सुनिश्चित किये जाने के आग्रह के साथ प्रेषित।।








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