शनिवार, 30 दिसंबर 2017
बुधवार, 27 दिसंबर 2017
एनजीटी के शुध्द पेयजल आपुर्ति करने वाले आदेशो पर मात्र और मात्र अफसरशाही की कागजी खानापुर्ति।
¶ एनजीटी के शुध्द पेयजल आपुर्ति करने वाले आदेश मात्र और मात्र कागजी खानापुर्ति।
¶ ग्राम पंचायतो मे आर.ओ संयंत्र से शुध्द पेयजल आपुर्ति का मात्र दिखावा, नही हो पाती नाममात्र के लगाये गये आर.ओ संयंत्र से सम्पुर्ण आबादी को शुध्द पेयजल आपुर्ति।
¶ सोनभद्र मे क्रिटिकली पाल्युटेड कलस्टर के रुप मे चिन्हित कलस्टर ककरी व रेणुसागर (ग्राम पंचायत ककरी व गरबन्धा) बाट जोह रहा शुध्द पेयजल, आर.ओ संयंत्र की।
¶ वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 15 मार्च 2010 को क्रिटकली पाल्युटेड एरिया मे चिन्हित है कलस्टर ककरी व रेणुसागर(ग्राम पंचायत ककरी व गरबन्धा) ।
¶ पाईप लाईन से आच्छादित दिखाकर नही लगाये गये है आर.ओ संयंत्र या तो नाम मात्र के लगाये गये है आर.ओ संयंत्र।
:- उ.प्र प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड व जिला प्रशासन सोनभद्र के प्रदुषण पर लाख गम्भीरता प्रकट करने का दावा करता हो परन्तु वास्तविकता यही समझी जा सकती है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 15 मार्च 2010 को क्रिटिकल पाल्युटेड एरिया मे चिन्हित ग्राम पंचायत ककरी (ककरी कलस्टर) जो एनसीएल के कोयला खदान के समीप है व कोयला खनन तथा परिवहन से गम्भीर प्रदुषण की जद मे है वहां आज तक नही लग पाया है शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु आर.ओ संयंत्र। एनजीटी के आदेश दिनांक 13.05.2014 मे ही क्रिटिकली पाल्युटेड कलस्टर्स मे चिन्हित ग्राम पंचायतो मे शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु आर.ओ संयंत्र लगाना सुनिश्चित किया गया था परन्तु इस आदेश की कागजी खनापुर्ति कुछ इस कदर की गयी की कलस्टर के अर्न्तर्गत आने वाले ग्राम पंचायतो की बात तो छोड ही दिजीये जो ग्राम पंचायत ककरी स्वयं गम्भीर प्रदुषण प्रभावित कलस्टर के रुप मे चिन्हित है वहा ही जिला प्रशासन के सम्बन्धित अधिकारीयो द्वारा पाईप लाईन से पेयजल आपुर्ति दर्शाते हुये आर.ओ संयंत्र नही लगाया गया ध्यान हो की केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दाखिल शपथ पत्रो मे स्वयं कबुल किया गया है कि ककरी कलस्टर मे भुगर्भ पेयजल फ्लोराईड युक्त है तथा पीने योग्य नही है वही ग्राम पंचायत ककरी मे लोग हैण्डपम्प का पानी पीने को मजबुर है वही ग्यात हो की ग्राम पंचायत परासी मे लगभग 30,000 की आबादी को शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु मात्र एक आर.ओ संयंत्र लगाया गया है जो शायद शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु आर.ओ संयंत्र की हकीकत बयां करता है ।
:- एनएसयुआई महासचिव अंकुश कुमार दुबे ने बताया की ग्राम पंचायत ककरी व गरबन्धा को पाईप लाईन से आच्छादित दिखाया गया है जबकि उक्त ग्राम पंचायतो के ग्रामीण आज भी हैण्डपम्प का पेयजल पीने को मजबुर है व अंकुश दुबे द्वारा ककरी व गरबन्धा मे आर.ओ संयंत्र स्थापित करने व जिन गांवो मे नाम मात्र के आर.ओ संयंत्र स्थापित है अनपरा, औडी, परासी, बांसी वहां सम्पुर्ण आबादी के अनुपात मे शुध्द पेयजल आपुर्ति हेतु आर.ओ संयंत्र स्थापित किये जाने हेतु व नवीन आदेश के संर्दर्भ मे जिलाधिकारी सोनभद्र का ध्यान आकृष्ट कराये जाने के बाबत् एक पत्र भी लिखा है कि ग्राम पंचायत परासी, अनपरा, औडी मे निवासरत आबादी के मांग के अनुसार तथा ककरी व गरबन्धा मे आर.ओ संयंत्र स्थापित किये जाये ताकि हरित अधिकरण के आदेश का अनुपालन हो सके व शुध्द पेयजल आपुर्ति सुनिश्चित हो सके वर्णित हो की एनजीटी के आदेश दिनांक 06.12.2017 के बिन्दु क्रमांक 6 मे भी वर्णित है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत के आबादी के अनुपात ओर जनसंख्या के मांग के अनुसार आर.ओ संयंत्र स्थापित किये जाने के आदेश है ।
गुरुवार, 26 अक्टूबर 2017
विस्थापितो ने वादाखिलाफी पर खोला मोर्चा,
*विस्थापितो ने वादाखिलाफी पर खोला मोर्चा,
*एनसीएल परियोजना परिसर के समक्ष घण्टे भर प्रदर्शन
उपरांत प्रशासन की मध्यस्थता पर सौपा एनसीएल प्रबंधन को ग्यापन
*सात दिवस के अन्दर विस्थापितो को रोजगार उपलब्ध कराने
की पारदर्शी प्रक्रिया चालु न होने पर दी उग्र आन्दोलन की चेतावनी
:-एनसीएल की ककरी परियोजना मे आन्दोलनरत रहे
विस्थापितो ने एनसीएल परियोजना प्रबंधन पर अधिभार के खनन व अभिवहन के कार्य मे
एनआइटी तथा कोल इंडिया के पुर्नवास एवं पुर्नस्थापन निति 2012 के प्रावधानों के अनुसार रोजगार दिये जाने को लेकर किये गये समझौते का
अनुपालन न करने तथा आन्दोलन खत्म होने के लगभग दो माह बीत जाने के उपरांत भी अभी
तक एक भी विस्थापित परिवार व उनके सदस्य को रोजगार न दिये जाने को लेकर परियोजना
परिसर के समक्ष प्रदर्शन किया तथा लगभग एक घण्टे तक प्रर्दशन करने के उपरांत
प्रशासन की मध्यस्थता पर प्रबंधन को ग्यापन सौपा।
:- आन्दोलन की अगुवाई कर रहे अंकुश दुबे ने बताया की
पुर्व मे आन्दोलन के दौरान विस्थापितो द्वारा खुन से लिखित माननीय प्रधानमंत्री,
भारत सरकार को सम्बोधित ग्यापन मे परियोजना द्वारा स्पष्ट किया गया
है कि अधिभार के खनन व अभिवहन के कार्य मे जिन भुविस्थापितो को भुमि अधिग्रहित
होने उपरांत रोजगार नही दिया गया था उन्हे रोजगार उपलब्ध कराने मे वरियता दी
जायेगी परन्तु अभी तक उक्त श्रेणी के एक भी विस्थापित को रोजगार नही दिया गया है
जबकि गैर विस्थापित मजदुर भर्ती निरन्तर जारी है तथा विस्थापित रोजी-रोटी को
मोहताज है इन्ही कारणों से विस्थापित आत्मदाह करने तक को मजबूर है व अगर सात दिवस
के अन्दर उक्त श्रेणी के विस्थापितो को रोजगार उपलब्ध कराने की पारदर्शी प्रक्रिया
चालु नही की गयी तो हम उग्र आन्दोलन करने को बाध्य होंगे।
:-ग्यापन सौपने के दौरान लक्ष्मीकांत दुबे,शिवानन्द यादव,राकेश बैस वार,बबुन्दर,ओमप्रकाश दुबे,राजेश भारती, आशीष
मिश्रा, धर्मेन्द्र यादव, राम नरेश आदि
सैकडों विस्थापित मौजूद रही।
रविवार, 17 सितंबर 2017
संघर्ष को मिला सम्मान अंकुश दुबे बनाये गये एनएसयूआई जिला महासचिव
अंकुश दुबे बनाये गये एनएसयूआई जिला महासचिव
*संघर्ष को मिला सम्मान
:-युवाओं की आवाज के तौर पर उभरते अंकुश कुमार दुबे जो विगत सालो मे विस्थापितो तथा सोनभद्र के छोटे-बड़े कई मुद्दों पर मुखरता-प्रखरता के साथ आवाज उठाते रहे है तथा कांग्रेस के लिये कार्य रहते है उन्हे भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन(एनएसयूआई) के जिलाध्यक्ष विवेक सिंह पटेल द्वारा जिला महासचिव बनाया गया है।
:-जिला महासचिव बनाये जाने पर अंकुश दुबे ने कहा की एनएसयूआई जिलाध्यक्ष द्वारा मुझे दिये गये दायित्वों का मै निष्ठापूर्वक निर्वहन करुंगा तथा सोनभद्र के शिक्षा व्यवस्था मे सुधार हेतु प्रखर पहल की जायेगी तथा इतनी मात्रा मे राजस्व देने वाले जनपद मे आज भी विद्यालयों तथा शैक्षिक संसाधनों की कमी है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है साथ ही साथ कांग्रेस की लाई गयी जनकल्याणकारी योजनाओं मनरेगा के मजदूरों का मजदुरी भुगतान,खाद्य सुरक्षा अधिनियम(एनएफएसए) 2013 का समुचित क्रियान्वयन समेत परियोजनाओं के प्रभावित परिवार व उनके सदस्यों को परियोजनाओं के प्रांगण में चल रहे विद्यालयों में वरियता के आधार पर प्रवेश तथा विस्थापितो से लिये जाने वाले शिक्षण शुल्क मे परियोजनाओं द्वारा अनुदान दिये जाने हेतु पहल की जायेगी।
:-रिहन्द से विस्थापित परिवार जो अनपरा क्षेत्र मे (भाठ) पहाड के उपर जाकर बसे है उन्हे इण्टरमिडियेट तक की शिक्षा हेतु भी दस किमी से ज्यादा का सफर कर अनपरा आना पडता है ऐसे मे पहाड उपर के विस्थापितों को भी आसानी से सुलभ शिक्षा मील सके इसके लिये एनएसयूआई के बैनर तले लडाई लड़ी जायेगी क्योंकि कांग्रेस तथा राहुल गांधी समाज के अन्तिम व्यक्ति की बात करते है तथा हमे भी उन सिध्दांतो पर चलकर सोनभद्र की दिशा-दशा बदलने हेतु लम्बा संघर्ष करना होगा।।
मंगलवार, 15 अगस्त 2017
विस्थापित प्रतिनिधियो पर पुलिसिया दमन की हुई कार्यवाई,
जेल मे कितनी जगह तुम्हारे,देखा है और देखेंगे
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विस्थापितो द्वारा पुर्वनियोजित वार्ता मे भागीदारी करने हेतु सीजीएम
आफिस ककरी पर पहुचने के दौरान निषेधाग्या उल्लंघन की कार्यवाई का होना स्पष्ट करता
है की हिन्दुस्तान मे भुमि अधिग्रहण से प्रभावितो की समस्या के हल के लिये सरकारो
ने पुलिसिया दमन की निति सुनिश्चित की है|
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रुके न जो,झुके न जो हम वो इंकलाब है
हर जुल्म का जवाब है
शुक्रवार, 11 अगस्त 2017
सोनभद्र के ग्राम खजुरा मे धुमधाम से हुआ विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन
सोनभद्र के ग्राम खजुरा मे धुमधाम से हुआ विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन
*एक तीर एक कमान,सब आदिवासी एक समान के नारो से गुंजा पुरा सोनभद्र
*आदिवासी समुदाय के पारम्परिक खेल तीरंदाजी,रस्साकशी तथा कर्मा,शैला आदि लोकनृत्यो का हुआ मंचन एवं आदिवासीयो ने जल,जंगल,जमीन तथा पुरातन आदिवासी संस्कृतियो की रछा का लिया संकल्प
:- दिनांक 9 अगस्त को सम्पुर्ण विश्व मे मनाये जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम से सोनभद्र भी अछुता नही रहा,जनपद के ग्राम खजुरा के पुर्व माध्यमिक विद्दालय मे अति उत्साह के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस,कार्यक्रम के आयोजक हरिनाथ खरवार तथा अमर सिंह खरवार ने आदिवासियो को सम्बोधित करते हुये कहा की वर्तमान मे जनजातियो की पुर्नसमीछा इनके पारम्परिक संस्कृतियो के आधार पर हो रही है तथा यदि हम अपनी संस्कृति को सुरछित नही रखेंगे तो आदिवाासी सम्बोधन हमसे छीन जायेगा तथा विकास की अंधी दौड मे जनजातिया विलुप्त हो जायेंगी इसलिये हमे अपनी संस्कृतियो को लेकर जागरुकता के साथ पहल करनी होगी वही कार्यक्रम मे पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने कहा की साउथ आफ कैमुर का हर मुलनिवासी आदिवासी है तथा सोनभद्र समेत सम्पुर्ण भारत की विश्व मे अलौकिक पहचान बनाने मे आदिवासी-मुलनिवासी पुरातन संस्कृतियो का अतुलनीय योगदान है साथ ही साथ वनाधिकार अधिनियम से आदिवासियो को मिलने वाले अधिकार को बताते हुये कहा की सर्वे सेटलमेंट के दौरान व्यापक पैमाने पर आदिवासियो-मुलनिवासियो के साथ हुये धोखे को लेकर आज भी पीडा है और इसका निवारण तभी होगा जब सोनभद्र का आदिवासी-मुलनिवासी जागरुक होकर अपनी हक-अधिकार की आवाज को बुलन्द करेगा||
कार्यक्रम मे तीरंदाजी मे विजित समयलाल खरवार को तथा सोनभद्र के दुर-दराज से आये कर्मा-शैला नृत्यकारो को आयोजक मण्डल द्वारा सम्मानित किया गया वही गदनाको एनजीओ की टीम ने आदिवासीयो को स्वरोजगार हेतु उपाय तथा स्वयं की संचालित योजनाये बतायी उपरोक्त समस्त कार्यक्रम के दौरान सहयोगी के रुप मे सेवा समर्पण संस्थान से सीताराम जी,कुलडोमरी प्रधान प्रतिनिधि समयलाल खरवार,रामदुलारे पनिका,हीरालाल खरवार,धर्मराज खरवार,लछ्मीकांत,विकास बैस आदि के साथ हजारो की तादाद मे आदिवासी समुदाय ने जागरुकता के साथ उपिस्थिति दर्ज करायी|
*एक तीर एक कमान,सब आदिवासी एक समान के नारो से गुंजा पुरा सोनभद्र
*आदिवासी समुदाय के पारम्परिक खेल तीरंदाजी,रस्साकशी तथा कर्मा,शैला आदि लोकनृत्यो का हुआ मंचन एवं आदिवासीयो ने जल,जंगल,जमीन तथा पुरातन आदिवासी संस्कृतियो की रछा का लिया संकल्प
:- दिनांक 9 अगस्त को सम्पुर्ण विश्व मे मनाये जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम से सोनभद्र भी अछुता नही रहा,जनपद के ग्राम खजुरा के पुर्व माध्यमिक विद्दालय मे अति उत्साह के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस,कार्यक्रम के आयोजक हरिनाथ खरवार तथा अमर सिंह खरवार ने आदिवासियो को सम्बोधित करते हुये कहा की वर्तमान मे जनजातियो की पुर्नसमीछा इनके पारम्परिक संस्कृतियो के आधार पर हो रही है तथा यदि हम अपनी संस्कृति को सुरछित नही रखेंगे तो आदिवाासी सम्बोधन हमसे छीन जायेगा तथा विकास की अंधी दौड मे जनजातिया विलुप्त हो जायेंगी इसलिये हमे अपनी संस्कृतियो को लेकर जागरुकता के साथ पहल करनी होगी वही कार्यक्रम मे पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने कहा की साउथ आफ कैमुर का हर मुलनिवासी आदिवासी है तथा सोनभद्र समेत सम्पुर्ण भारत की विश्व मे अलौकिक पहचान बनाने मे आदिवासी-मुलनिवासी पुरातन संस्कृतियो का अतुलनीय योगदान है साथ ही साथ वनाधिकार अधिनियम से आदिवासियो को मिलने वाले अधिकार को बताते हुये कहा की सर्वे सेटलमेंट के दौरान व्यापक पैमाने पर आदिवासियो-मुलनिवासियो के साथ हुये धोखे को लेकर आज भी पीडा है और इसका निवारण तभी होगा जब सोनभद्र का आदिवासी-मुलनिवासी जागरुक होकर अपनी हक-अधिकार की आवाज को बुलन्द करेगा||
कार्यक्रम मे तीरंदाजी मे विजित समयलाल खरवार को तथा सोनभद्र के दुर-दराज से आये कर्मा-शैला नृत्यकारो को आयोजक मण्डल द्वारा सम्मानित किया गया वही गदनाको एनजीओ की टीम ने आदिवासीयो को स्वरोजगार हेतु उपाय तथा स्वयं की संचालित योजनाये बतायी उपरोक्त समस्त कार्यक्रम के दौरान सहयोगी के रुप मे सेवा समर्पण संस्थान से सीताराम जी,कुलडोमरी प्रधान प्रतिनिधि समयलाल खरवार,रामदुलारे पनिका,हीरालाल खरवार,धर्मराज खरवार,लछ्मीकांत,विकास बैस आदि के साथ हजारो की तादाद मे आदिवासी समुदाय ने जागरुकता के साथ उपिस्थिति दर्ज करायी|
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| आदिवासियो को सम्बोधित करते हुये अंकुश दुबे |
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| आदिवासियो को सम्बोधित करते हुये अंकुश दुबे |
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| आदिवासियो को सम्बोधित करते हुये अंकुश दुबे |
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| विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम के आयोजक हरिनाथ खरवार जी(पीले गमछे मे) |
गुरुवार, 10 अगस्त 2017
विस्थापित व प्रबंधन के बीच वार्ता नही हुई प्रबंधन के अधिकारी रहे फरार तथा पुरा सीजीएम आफिस रहा खाली एवं कुछ देर बाद लटका ताला
विस्थापित व प्रबंधन के
बीच वार्ता नही हुई प्रबंधन के अधिकारी रहे फरार तथा पुरा सीजीएम आफिस रहा खाली
एवं कुछ देर बाद लटका ताला
_________________________
*विस्थापितो को दिनांक 10/08/2017 को वार्ता तथा संस्तुति हेतु प्रशासन(एसओ) ने दिलवाया था प्रबंधन से
आश्वासन
*विस्थापितो के नारेबाजी के बाद पहुचे प्रशासन ने कहा की प्रबंधन
तथा ग्राम प्रधानो के बीच वार्ता होकर सहमति बन चुकी है जबकि उपरोक्त वार्ता के
बारे मे आन्दोलनकारी विस्थापित प्रतिनिधिमण्डल को नही दी गयी थी सुचना
*विस्थापितो को चौकी प्रभारी गजानन्द यादव ने दिलाया आश्वासन की सफल
करायी जायेगी 19 अगस्त की वार्ता
:-पुर्व निर्धारित प्रबंधन तथा विस्थापितो की वार्ता
आज नही हुई कारण रहा प्रबंधन की गैरमौजुदगी लगातार वादाखिलाफी से छुब्ध विस्थापितो
ने सीजीएम आफिस प्रागंण मे घुसने की जब कोशिश की तब एनसीएल सुरछाकर्मियो ने उन्हे
रोकने की कोशिश की तब जमकर नोंक-झोंक हुई तथा अन्तत: विस्थापित सीजीएम आफिस के
अन्दर पहुच कर धरने पर बैठ गये जीससे प्रशासन की तरफ से लाचार होकर रेनुसागर चौकी
प्रभारी गजानन्द यादव को आना पडा प्रशासन को देखते ही विस्थापितो का गुस्सा और
उबाल पे आ गया तथा विस्थापितो ने नारेबाजी करते हुये विरोध किया वादाखिलाफी का
स्थिति को देखते हुये चौकी प्रभारी ने तत्काल फोन के जरीये प्रबंधन से बात की तथा
विस्थापितो से आग्रह कीया की प्रबंधन को एक और मौका दे विस्थापित काफी देर के बाद
विस्थापित प्रतिनिधिमण्डल ने दिनांक 19 अगस्त को वार्ता हेतु
सहमति जतायी तथा प्रशासन ने वायदा कीया की वार्ता के दौरान ही सम्भावित विस्थापितो
के वरियता आधार पर रोजगार का समायोजन अधिभार के खनन व अभिवहन के कार्यो मे कीया
जायेगा तथा अन्य ठेकेदारी प्रथा के कार्यो मे रोजगार हेतु दिशा निर्देश जारी कीये
जायेंगे वही प्रबंधन ने कई बार ककरी परियोजना
से प्रभावित ग्रामो ककरी,परासी,औडी,रेहटा,बाँसी के प्रधानो के साथ वार्ता तथा समझौता
होने की बात को रखा गया जीसपर विस्थापितो ने आक्रोश के साथ कहा की काली दाल वाली
वार्ता मे हमारा अधिकार मारने का समझौता हुआ है तभी तो आन्दोलनरत विस्थापित
प्रतिनिधिमण्डल को सुचना नही दी गयी वही वार्ता की बात स्वीकारने से प्रधान लगातार
मुँह चुराते नजर आये तथा जब सीजीएम आफिस
पर लटका ताला तब जाकर हटे विस्थापित||
गुरुवार, 3 अगस्त 2017
दिनांक 31/07/2017 को विस्थापित,परियोजना प्रबंधन,प्रशासन(एसओ अनपरा) तथा निर्वाचित प्रतिनिधियो के बीच तीन चरणो मे वार्ता लगभग सात घण्टे चली जो अन्तत: असफल रही
_________________________
विस्थापित और प्रबंधन के बीच.
वार्ता असफल
_________________________
आज दिनांक 31/07/2017 को विस्थापित,परियोजना प्रबंधन,प्रशासन(एसओ अनपरा) तथा निर्वाचित प्रतिनिधियो के बीच तीन चरणो मे वार्ता लगभग सात घण्टे चली जो अन्तत: असफल रही वार्ताओ के असफल होने के दौरान विस्थापितो ने ककरी मुख्यमहाप्रबंधक कार्यालय मे ही शुरु की गांधीगिरी||
वार्ता के प्रमुख बिन्दु जो विस्थापित प्रतिनिधियो द्वारा उठाये गये-
(1) एनआईटी के बिन्दु 25.1-
Contractors are to employ,to the extent possible(as per policy decision of the company valid from time to time),local project affected people.
[ठेकेदार यथासम्भव (कम्पनी के समय-समय पर वैध निति निर्णय के अनुसार)स्थानीय परियोजना प्रभावित लोगो को नियोजित करना है|]
:-उपरोक्त बिन्दु पर परियोजना प्रबंधन द्वारा "ठेकदार द्वारा यथासम्भव" की बार-बार व्याख्या की गयी परन्तु वही "कम्पनी के समय-समय पर वैध निति निर्णय के अनुसार स्थानीय परियोजना प्रभावित लोगो को नियोजित करना है" को लेकर बरगलाने की कोशिश की गयी|
(2) कोल इण्डिया की पुर्नवास व पुर्नव्यवस्थापन निति 2012 मे "मुआवजा व पुर्नवास पात्रता विकल्प" मे दिये गये प्रोवीजन्स के अनुसार-
Contractors will also be persuaded to give job to eligible PAPs on a preferential basis,where feasible as per terms.
[ठेकेदारो को भी इच्छुक PAPs को तरजीही आधार पर नौकरी दिये जाने के लिये राजी किया जायेगा,जहाँ अनुबन्ध की शर्तो के अनुसार के सम्भव है|]
:-उपरोक्त बिन्दु पर परियोजना प्रबंधन द्वारा यह स्पष्ट नही कीया गया की ठेकेदारो को PAPs को नौकरी देने के लिये राजी कौन करेगा||
(3)एनसीएल ककरी परियोजना मे काश्तकारो की भुमि का अधिग्रहण अधिसुचना संख्या-3303 तथा 1021 मे हुआ,अधिग्रहण के समय काश्तकारो की भुमि के शेयरक्रापर्स,लेन्ड लेसेज टेनेन्ट और डे लेबर्स के वर्गीकरण नही किये जाते थे परन्तु नई नितियो मे PAPs अर्थात काश्तकार की जिवित अन्तिम वयस्क पीढी के साथ इन्हे भी वर्गीकृत किया जाता है|
परन्तु परियोजना प्रबंधन PAPs की श्रेणी मे काश्तकारो को रखने की बात करता रहा ना की उनकी वयस्क पीढी को|
(4) कास्ट कटिंग
*परियोजना मे कार्यरत अधिभार हटाओ की कम्पनी मे दुसरी फर्मो के माध्यम से पेटी कान्ट्रैक्टर के रुप मे कार्य का क्रियान्वयन कराये जाने से मुख्य कार्यदायी संस्था की मैन पावर कम हो जाती है तथा उन्हे कम मजदुरो की अावश्कता पडती है जिसका प्रभाव विस्थापित मजदुरो की भर्ती पर अप्रत्यछ रुप से पडता है|
:-उपरोक्त बिन्दु पर प्रतिनिधियो द्वार प्रश्न किये जाये पर परियोजना प्रबंधन ने साफ जवाब दिया की हमारे पास मैन पावर की गणना नही है जबकि स्पष्ट कर दिया जाये की ठेका होते समय ही मैन पावर के रेट(मिनिमम वेज्स) भी उनमे इनक्लुड होते है तथा दुसरी फर्मो के माध्यम से काम को रोके जाने पर कोई आशाजनक उत्तर नही मिला||
(4)पुर्व मे 104 मजदुरो की हुई भर्ती मे मात्र छ: PAPs की भर्ती हुई है जीस पर प्रतिनिधियो द्वारा प्रश्न किया गया की बाकी 98 भर्तीयो की पुर्नसमीछा हो तथा समीछा के दौरान PAPs को भी वरियता के आधार पर मौका दिया जाये|
:-उपरोक्त बिन्दु पर भी परियोजना प्रबंधन द्वारा मात्र और मात्र बरगलाने की कोशिश की गयी|
इस आन्दोलन की वजह से पहली बार परियोजना प्रबंधन और ठेकेदारो(ओबी रीमुवल) के बीच के काले खेल का सिंडिकेट खुल कर सामने आया है|
_________________________
उपरोक्त समस्त बिन्दुओ पर निऱाशाजनक उत्तर तथा ओबी रिमुवल संस्था की तरफ से निर्णय संस्तुति करने वाले की उपलब्धता न होने की वजह से वार्ता असफल हुई तथा निर्णय लिया गया की दिनांक 10/08/2017 को पुन: वार्ता होगी जिसमे ओबी रिमुवल संस्था के प्रमुख समेत सभी निर्वाचित प्रतिनिधि,विस्थापित प्रतिनिधि,प्रशासन की उपलब्धता रहेगी|
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विस्थापित और प्रबंधन के बीच.
वार्ता असफल
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आज दिनांक 31/07/2017 को विस्थापित,परियोजना प्रबंधन,प्रशासन(एसओ अनपरा) तथा निर्वाचित प्रतिनिधियो के बीच तीन चरणो मे वार्ता लगभग सात घण्टे चली जो अन्तत: असफल रही वार्ताओ के असफल होने के दौरान विस्थापितो ने ककरी मुख्यमहाप्रबंधक कार्यालय मे ही शुरु की गांधीगिरी||
वार्ता के प्रमुख बिन्दु जो विस्थापित प्रतिनिधियो द्वारा उठाये गये-
(1) एनआईटी के बिन्दु 25.1-
Contractors are to employ,to the extent possible(as per policy decision of the company valid from time to time),local project affected people.
[ठेकेदार यथासम्भव (कम्पनी के समय-समय पर वैध निति निर्णय के अनुसार)स्थानीय परियोजना प्रभावित लोगो को नियोजित करना है|]
:-उपरोक्त बिन्दु पर परियोजना प्रबंधन द्वारा "ठेकदार द्वारा यथासम्भव" की बार-बार व्याख्या की गयी परन्तु वही "कम्पनी के समय-समय पर वैध निति निर्णय के अनुसार स्थानीय परियोजना प्रभावित लोगो को नियोजित करना है" को लेकर बरगलाने की कोशिश की गयी|
(2) कोल इण्डिया की पुर्नवास व पुर्नव्यवस्थापन निति 2012 मे "मुआवजा व पुर्नवास पात्रता विकल्प" मे दिये गये प्रोवीजन्स के अनुसार-
Contractors will also be persuaded to give job to eligible PAPs on a preferential basis,where feasible as per terms.
[ठेकेदारो को भी इच्छुक PAPs को तरजीही आधार पर नौकरी दिये जाने के लिये राजी किया जायेगा,जहाँ अनुबन्ध की शर्तो के अनुसार के सम्भव है|]
:-उपरोक्त बिन्दु पर परियोजना प्रबंधन द्वारा यह स्पष्ट नही कीया गया की ठेकेदारो को PAPs को नौकरी देने के लिये राजी कौन करेगा||
(3)एनसीएल ककरी परियोजना मे काश्तकारो की भुमि का अधिग्रहण अधिसुचना संख्या-3303 तथा 1021 मे हुआ,अधिग्रहण के समय काश्तकारो की भुमि के शेयरक्रापर्स,लेन्ड लेसेज टेनेन्ट और डे लेबर्स के वर्गीकरण नही किये जाते थे परन्तु नई नितियो मे PAPs अर्थात काश्तकार की जिवित अन्तिम वयस्क पीढी के साथ इन्हे भी वर्गीकृत किया जाता है|
परन्तु परियोजना प्रबंधन PAPs की श्रेणी मे काश्तकारो को रखने की बात करता रहा ना की उनकी वयस्क पीढी को|
(4) कास्ट कटिंग
*परियोजना मे कार्यरत अधिभार हटाओ की कम्पनी मे दुसरी फर्मो के माध्यम से पेटी कान्ट्रैक्टर के रुप मे कार्य का क्रियान्वयन कराये जाने से मुख्य कार्यदायी संस्था की मैन पावर कम हो जाती है तथा उन्हे कम मजदुरो की अावश्कता पडती है जिसका प्रभाव विस्थापित मजदुरो की भर्ती पर अप्रत्यछ रुप से पडता है|
:-उपरोक्त बिन्दु पर प्रतिनिधियो द्वार प्रश्न किये जाये पर परियोजना प्रबंधन ने साफ जवाब दिया की हमारे पास मैन पावर की गणना नही है जबकि स्पष्ट कर दिया जाये की ठेका होते समय ही मैन पावर के रेट(मिनिमम वेज्स) भी उनमे इनक्लुड होते है तथा दुसरी फर्मो के माध्यम से काम को रोके जाने पर कोई आशाजनक उत्तर नही मिला||
(4)पुर्व मे 104 मजदुरो की हुई भर्ती मे मात्र छ: PAPs की भर्ती हुई है जीस पर प्रतिनिधियो द्वारा प्रश्न किया गया की बाकी 98 भर्तीयो की पुर्नसमीछा हो तथा समीछा के दौरान PAPs को भी वरियता के आधार पर मौका दिया जाये|
:-उपरोक्त बिन्दु पर भी परियोजना प्रबंधन द्वारा मात्र और मात्र बरगलाने की कोशिश की गयी|
इस आन्दोलन की वजह से पहली बार परियोजना प्रबंधन और ठेकेदारो(ओबी रीमुवल) के बीच के काले खेल का सिंडिकेट खुल कर सामने आया है|
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उपरोक्त समस्त बिन्दुओ पर निऱाशाजनक उत्तर तथा ओबी रिमुवल संस्था की तरफ से निर्णय संस्तुति करने वाले की उपलब्धता न होने की वजह से वार्ता असफल हुई तथा निर्णय लिया गया की दिनांक 10/08/2017 को पुन: वार्ता होगी जिसमे ओबी रिमुवल संस्था के प्रमुख समेत सभी निर्वाचित प्रतिनिधि,विस्थापित प्रतिनिधि,प्रशासन की उपलब्धता रहेगी|
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