· एनसीएल द्वारा रेनुसागर पावर डिवीजन को भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-4 की उपधारा-1(ए) के तहत् विज्ञापित भूमि बगैर अनुमति लीज पर देने तथा रेनुसागर पावर डिवीजन द्वारा बगैर अनुमति गैर वानिकी कार्य किये जाने का मामला।
· अंकुश दुबे सचिव, एन.एस.यु.आई(पुर्वी
उत्तर प्रदेश) ने पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को भेजा पत्र।
:- नार्दर्न
कोलफिल्डस लिमिटेड सिंगरौली की ककरी व बीना कोयला खदान परियोजना हेतु रेणुकुट वन
प्रभाग के अनपरा वन रेंज के अन्तर्गत ग्राम औडी, परासी,
ककरी, बांसी व जमशिला मे अधिग्रहित कुल 38.29
एकड वन भूमि जो भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-4 की उपधारा-1(ए) के तहत्
विज्ञापित है को एनसीएल द्वारा हिन्डाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रेनुसागर पावर
डिवीजन को बगैर भारत सरकार की अनुमति के लीज पर दी गयी है साथ ही साथ रेनुसागर
पावर डिवीजन द्वारा बगैर अनुमति के उक्त वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य किया जा रहा
है जो कि भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-5 व धारा-26 तथा वन(संरक्षण)
अधिनियम-1980 के धारा-2 का उल्लंघन है तथा वन अपराध है। उक्त वन अपराध किये जाने
बाबत् श्री बी. साईराम अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एनसीएल सिंगरौली, श्री नलिन कुमार खुलबे महाप्रबंधक एनसीएल ककरी, श्री
इंद्रजीत सिंह, महाप्रबंधक एनसीएल बीना, श्री कुमार मंगलम बिडला चैयरमैन हिन्डाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, श्री सतीश पई, मैनेजिंग डायरेक्टर हिन्डाल्को
इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा आर.पी सिंह, युनिट हेड रेनुसागर पावर
डिवीजन के विरुध्द भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-5 व धारा-26 तथा
वन(संरक्षण) अधिनियम-1980 की धारा-2 के तहत् प्राथमिकी दर्ज किये जाने हेतु अंकुश
दुबे सचिव, एन.एस.यु.आई(पुर्वी उत्तर प्रदेश) ने पुलिस
अधीक्षक सोनभद्र को पत्र भेजा है। उन्होने कहा है कि एनसीएल के अधिकारियो द्वारा
तत्समय निजी लाभ अर्जित कर नियमो को ताक पर रखकर वन भूमि गलत तरीके से रेनुसागर
पावर डिवीजन को लीज पर दी है वही रेनुसागर पावर डिवीजन द्वारा बगैर भारत सरकार की
अनुमति के वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य किया जा रहा है जिससे सरकार को राजस्व की
क्षति भी हो रही है तथा यह वन अपराध का गम्भीर प्रकरण है जिस पर कार्यवाही आवश्यक
है।



