नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की
बीना परियोजना मे अधिभार के खनन व अभिवहन के कार्य मे रोजगार को लेकर विस्थापितो
मे हलचल तेज हो गयी है। आज एनसीएल के विस्थापितो ने महाप्रबंधक कार्यालय बीना
परिसर मे एनसीएल प्रबंधन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की व अधिभार के खनन व अभिवहन के
कार्य मे विस्थापितो को रोजगार उपलब्ध कराये जाने हेतु महाप्रबंधक, एनसीएल बीना को सम्बोधित ग्यापन सौपा। ग्यापन सौपने के दरम्यान एनसीएल के
अधिकारियो व विस्थापित नेता अंकुश दुबे के मध्य तीखी नोकझोक भी हुई जिससे नाराज
विस्थापित एनसीएल जीएम आफिस के समक्ष ही धरने पर बैठ गये थे परन्तु एनसीएल के
अधिकारियो के सुझ बुझ के चलते यह धरना कुछ समय बाद ही ग्यापन सौपकर समाप्त हो गया।
विस्थापितो द्वारा सौपे गये ग्यापन मे कहा गया है कि कोल इण्डिया की
पुर्नवास-पुर्नस्थापन नीति-2012, एनआईटी मे भूमि अधिग्रहण से
प्रभावित परिवार के सदस्यो को रोजगार दिये जाने का प्राविधान है व भारतीय संविधान
के अनुच्छेद-21 का तार्किक उप सिध्दान्त है भूमि अधिग्रहण से
प्रभावितो को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना परन्तु एनसीएल प्रबन्धन की उदासीनता के
कारण एनसीएल मे संचालित अधिभार के खनन व अभिवहन के कार्य मे विस्थापितो के लिये
सृजित रोजगार का बिचौलियो द्वारा अधिभार के खनन व अभिवहन का कार्य करने वाले
कम्पनियो के अधिकारियो के साथ मिलकर व्यापार किया जाता है जिससे विस्थापित रोजगार
से वंचित है तथा रोजी-रोटी को मोहताज है जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14,
15 व 21 का उल्लंघन है। विस्थापितो ने
जिलाधिकारी-सोनभद्र की अध्यक्षता मे विस्थापित प्रतिनिधियो के साथ एक बैठक आयोजित
कर रोजगार उपलब्ध कराने की पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित कर रोजगार उपलब्ध कराये
जाने की मांग की है। इस दरम्यान विस्थापित नेता अंकुश दुबे, कांग्रेस
नेता मनोनीत रवि, आदिवासी नेता हरिनाथ खरवार, सेवादल महासचिव दयासागर दुबे, सामाजिक कार्यकर्ता
रविन्द्र भारती, राकेश पनिका, ओम
प्रकाश दुबे, विस्थापित नेता नीरज सिंह गहरवार, नीरज पाण्डेय, जनमेजय पनिका, उपेन्द्र
पाण्डेय, विनोद शर्मा, रुमैन खान,
सद्दाम हुसैन के साथ पचासो की संख्या मे विस्थापित मौजुद रहे।
शनिवार, 11 जुलाई 2020
विस्थापितो ने रोजगार की मांग को लेकर एनसीएल बीना महाप्रबंधक कार्यालय पर किया प्रदर्शन, सौपा ग्यापन।
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