रविवार, 2 अगस्त 2020

वन विभाग के बेदखली की कार्यवाही के विरुध्द भेजी गयी शिकायत

तहसील दुध्दी के ग्राम परासी मे 27 जूलाई को वन विभाग द्वारा अतिक्रमण के नाम पर की गयी बेदखली की कार्यवाही के  खिलाफ एनएसयुआई जिला महासचिव अंकुश दुबे ने मानवाधिकार आयोग, एसटी कमीशन, एससी कमीशन व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को शिकायती पत्र भेजा है। अंकुश दुबे ने अपने पत्र मे आरोप लगाया है कि वन विभाग द्वारा स्थानीय पुलिस बल के सहयोग से जिस भूमि से अतिक्रमण के नाम पर मकानो को ध्वस्त करने व बेदखली की कार्यवाही का प्रयास किया गया है वह नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की ककरी परियोजना हेतु CBA (A&D) के प्राविधानानुसार जारी अधिसूचनाः-1021 के द्वारा अधिग्रहित की गयी है तथा वन विभाग से उसका कोई वास्ता सरोकार नही है। नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड के स्तर पर अतिक्रमण करने वालो से निपटने हेतु परियोजनावार भू सम्पदा अधिकारी न्यायालयो का गठन किया गया है जिसमे अतिक्रमणकारी को लोक परिसर मे (अनाधिकृत दखलदारो की बेदखली) अधिनियम-1971 की धारा-4 की उपधारा-1 के तहत् नोटिस जारी की जाती है व सम्यक सुनवाई के उपरान्त अतिक्रमणकारी के विरुध्द आदेश होने के उपरान्त कोई कार्यवाही की जाती है पर 27 जूलाई को हुई कार्यवाही के पुर्व एनसीएल द्वारा इस तरह की कोई कार्यवाही नही की गयी तथा इस कार्यवाही मे एनसीएल कोई भूमिका भी नही थी व वन विभाग द्वारा बगैर कोई नोटिस व बगैर किसी पुर्व सूचना के अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर गैर वन भूमि पर स्थित मकानो को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया जो इस प्रकरण से प्रभावित 6 आदिवासी, 2 अनुसूचित जाति व 7 अन्य वर्ग के गरीब परिवारो  को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, विधि के समक्ष समता का अधिकार का हनन है तथा उन्होने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्यवाही से प्रभावित होने वाले परिवारो के विरोध दर्ज कराने पर वनकर्मियो द्वारा लाठी भांजी गयी है जिसमे एक आदिवासी महिला मानमती गोंड पत्नी रामजतन गोंड को गम्भीर चोट आई है तथा प्रशासनिक दबाव मे उसका सरकारी चिकित्सालय डिबुलगंज मे इलाज नही किया जा रहा है। उन्होने इस मामले की एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर जांच किये जाने तथा अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर बेदखली की कार्यवाही का प्रयास करने वाले वनकर्मियो के विरुध्द आदिवासी व अनुसूचित जाति के परिवारो को प्रताडित किये जाने बाबत् एससी-एसटी(अत्याचार निरोधक )एक्ट-1989 के तहत् आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने, घायल आदिवासी महिला को समुचित इलाज की सूविधा व क्षतिपुर्ति दिये जाने के साथ-साथ मकान जिस भूमि पर स्थित है का आवासीय अधिकार दिये जाने की मांग की है।
















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